Tuesday 28 June 2022
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मानसून की वर्षा में कमी

देश में मानसून के मौसम में एक जून से दस अगस्त 2014 तक वर्षा में 18 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

इस दौरान मानसून की वर्षा में आई कमी का राज्यवार विवरण नीचे दिया गया है —

     क्रम संख्या

राज्य

उप- क्षेत्र

वर्षा में प्रतिशत कमी

1

जम्मू और कश्मीर

जम्मू और कश्मीर

-48

2

हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश

-35

3

पंजाब

पंजाब

-58

4

हरियाणा चंड़ीगढ़ और दिल्ली

हरियाणा चंड़ीगढ़ और दिल्ली

-56

5

उत्तर प्रदेश

पश्चिमी उत्तर प्रदेश

-47

पूर्वी उत्तर प्रदेश

-34

6

बिहार

बिहार

-28

7

असम और मेघालय

असम और मेघालय

-29

8

अरूणाचल प्रदेश

अरूणाचल प्रदेश

-21

9

नगालैंड,मणिपुर,मिजोरम और त्रिपुरा

नगालैंड,मणिपुर,मिजोरम और त्रिपुरा

-47

10

गुजरात

गुजरात दादर नगर हवेली  और दमन प्रांत

-24

11

महाराष्ट्र

विदर्भ

-23

मराठवाड़ा

-59

12

कर्नाटक

उत्तरी आंतरिक कर्नाटक

-24

13

तेलंगाना

तेलंगाना

-50

14

आंध्र प्रदेश

रायलसीमा

-29

तटीय आंध्र प्रदेश

-37

15

लक्षद्वीप

लक्षद्वीप

-38

देश के 18 उप-क्षेत्रों ओडिशा (+21 प्रतिशत), उत्तराखंड़ (-16 प्रतिशत), पश्चिमी राजस्थान (2 प्रतिशत), पूर्वी राजस्थान(+10 प्रतिशत), पश्चिमी मध्य प्रदेश(3 प्रतिशत), पूर्वी मध्य प्रदेश(-12 प्रतिशत), छत्तीसगढ़ (+1 प्रतिशत), झारखंड़ (-10 प्रतिशत), पश्चिम बंगाल का गांगेय क्षेत्र (-10 प्रतिशत), पश्चिम बंगाल का हिमालयी क्षेत्र (-19 प्रतिशत), सौराष्ट्र कच्छ और दीव (-15 प्रतिशत), कोकंण और गोवा (8 प्रतिशत), मध्य महाराष्ट्र (-13 प्रतिशत), तटीय कर्नाटक (5 प्रतिशत), दक्षिण कर्नाटक का भीतरी भाग (+17 प्रतिशत), तमिलनाडु और पुंडुचेरी (8 प्रतिशत), केरल (2 प्रतिशत) और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (+4 प्रतिशत) में सामान्य और अधिक वर्षा दर्ज की गई।

जून में लंबी अवधि के वर्षा अनुमान जारी करते समय मानसून 2014 के दौरान 93 प्रतिशत मौसमी वर्षा होने के अऩुमान जताये गये थे। उस समय बताया गया था कि अगस्त 2014 के अंत तक अल नीनों प्रभाव के चलते लंबी अवधि में वर्षा की औसत मात्रा सामान्य से कम रह सकती है। प्रशांत और हिन्द महासागर के समुद्र तल के तापमान के सांख्यिकी और गतिशील (सक्रिय) प्रारूप के आधार पर यह अऩुमान व्यक्त किये गये थे।

इन अनुमानों के बावजूद मानसून के पहले महीने जून में देश में लंबी अवधि में 43 फीसदी वर्षा की कमी दर्ज की गयी। केरल में मानसून के देर से पहुंचने के कारण जून में कम वर्षा दर्ज की गयी और उसके बाद देश में मानसून की प्रगति भी धीमी रही। जून के दूसरे सप्ताह में अरब सागर में नानौक तूफान बनने से मानसून की प्रगति में बाधा आई जिसके कारण मानसून मध्य और उत्तरी भारत में देर से पहुंचा और वर्षा में कमी दर्ज की गई।

यह जानकारी लोकसभा में आज विज्ञान और प्रोद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ जितेन्द्र सिंह ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

अर्थव्यवस्था में सुस्ती का संकेत देते हुए जून में औद्योगिक उत्पादन की दर भी घटकर 3.4% रह गई है जबकि मई में यह 5% थी। इसमें गिरावट का मुख्य कारण उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन में कमी आना है। इसका मतलब है कि मानसून अपेक्षा से कम रहने के चलते उपभोक्ता वस्तुओं की मांग पर उसका असर दिखने लगा है।

पत्र सूचना कार्यालय

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