Saturday 18 September 2021
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महाकुंभ 2021: स्विट्जरलैंड से पैदल कुंभ स्नान करने पहुंचे बेन बाबा

हजारों किलोमीटर की यात्रा और कई देशों से गुजरने के बाद बाघा बॉर्डर से बेन भारत में दाखिल हुए और तब से यहीं बस गए हैं। बेन हिमाचल में रहते हैं और फिलहाल हरिद्वार के कुंभ मेले में आए हुए हैं

बेन बाबा ने स्विट्जरलैंड से हरिद्वार तक का सफर अपने कदमों से नाप दिया। भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और योग से प्रभावित बेन बाबा पांच साल में करीब साढ़े छह हजार किलोमीटर पैदल सफर कर हरिद्वार कुंभ स्नान करने पहुंचे हैं। 

बेन बाबा पेशे से वेब डिजाइनर हैं। स्विट्जरलैंड की लग्जरी जिंदगी छोड़कर अध्यात्म और योग में रम गए हैं। सनातन धर्म और योग का प्रचार-प्रसार को जिंदगी का मकसद और पैदल विश्व यात्रा को अपनी साधना बना लिया है। 33 वर्षीय बेन बताते हैं भारतीय संस्कृति, परंपरा और सभ्यता अद्भुत है। योग ध्यान और भारतीय वेद पुराण सबसे मूल्यवान हैं। इनमें अलौकिक ताकत है।

इन्हीं से प्रभावित होकर भारत भ्रमण का लक्ष्य बनाया। स्विट्जरलैंड में ही हिंदी सीखी। पांच साल पहले स्विट्जरलैंड से भारत के लिए पैदल सफर शुरू किया। चार साल के लंबे सफर के बाद भारत के पहुंचे। पांचवें साल में भारत में भ्रमण कर रहे हैं। मंदिरों, मठों में जाकर भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म का अध्ययन कर रहे हैं। हिमाचल के कांगड़ा से 25 दिनों के पैदल सफर के बाद हरिद्वार पहुंचे हैं। 

बेन बाबा की कहानी काफी दिलचस्प है। 5 साल पहले बेन का अपने काम और स्विट्जरलैंड से मोह भंग हो गया और वह पैदल ही भारत की ओर चल पड़े। हजारों किलोमीटर की यात्रा और कई देशों से गुजरने के बाद बाघा बॉर्डर से बेन भारत में दाखिल हुए और तब से यहीं बस गए हैं। बेन हिमाचल में रहते हैं और फिलहाल हरिद्वार के कुंभ मेले में आए हुए हैं।

29 साल का स्विट्जरलैंड का रहने वाला यह वेब डिजाइनर रोज नंगे पैर ही कई किलोमीटर तक पैदल घूमता है। खास बात यह है कि बेन अपने पास मोबाइल फोन भी नहीं रखते। सिर्फ एक छोटा सा झोला और एक स्टील का लोटा ही उनकी जरूरत है। बेन का कहना है कि वह भिक्षा मांग कर अपना गुजारा करते हैं। उनका कोई भी ठोर ठिकाना नहीं है। जहां भी रात हो जाती है वे खुले आसमान के नीचे वहीं सो जाते हैं।

उन्होंने कहा कि यूरोप में पैसा है, लग्जरी जिंदगी है, लेकिन खुशी नहीं है। खुशी को पैसों से कभी नहीं खरीदा जा सकता है। खुशी तो योग और ध्यान से मिलती है। स्विट्जरलैंड में वे प्रति घंटे 10 यूरो कमाते थे। गाड़ी, घर और लग्जरी लाइफ थी। औसतन प्रति घंटे 10 डॉलर करीब 720 भारतीय रुपये कमाते थे। मन अंदर से बिल्कुल भी खुश नहीं था। भारतीय संस्कृति और योग के बारे में पढ़ा और अध्यात्म एवं योग के लिए स्विट्जरलैंड छोड़ दिया। बेन पतंजलि से योग भी सीख रहे हैं।

बेन बाबा को गायत्री मंत्र और गंगा आरती कंठस्थ याद है। बेन किसी अखाड़े से नहीं जुड़े हैं। इसलिए हरिद्वार में कभी हरकी पैड़ी तो कभी गंगा किनारे टहलते रहते हैं। गंगा किनारे घाटों को अपना ठिकाना बनाया है। बेन को नंगे पैर गायत्री मंत्र का जाप करते और गंगा आरती करते देख श्रद्धालु भी अचंभित होते हैं।

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