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Wednesday 20 November 2019
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पाकिस्तान वैश्विक आतंकवादियों को ‘पेंशन’ क्यों देता है? भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पूछा

भारत ने इमरान ख़ान को केवल कश्मीर मुद्दे पर अनर्गल प्रलाप करने के लिए नहीं दुत्कारा बल्कि उन्हें ओसामा बिन लादेन, मसूद अज़हर, यहाँ तक कि 1971 की भी याद दिलाई

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान द्वारा भारत की आलोचना के लिए संयुक्त राष्ट्र के मंच के इस्तेमाल करते हुए कश्मीर में “खूनखराबे” की चेतावनी देने के एक दिन बाद भारत ने शनिवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से कहा कि उनकी सरकार को यह स्वीकार करना होगा कि उनका देश दुनिया में एकमात्र आतंकवादियों का पेंशन-दाता है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में ख़ान के संबोधन के उत्तर में भारत के अधिकार का प्रयोग करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रथम सचिव विदिशा मैत्र ने कहा, “क्या पाकिस्तान यह स्वीकार करेगा कि वह दुनिया की एकमात्र सरकार है जो संयुक्त राष्ट्र में बतौर आतंकवादी सूचिबद्ध एक व्यक्ति को पेंशन प्रदान करती है जो कि उसी श्रेणी में आता है जिस में प्रतिबंधित अल क़ायदा और इस्लामिक स्टेट दर्ज हैं?”

“क्या पाकिस्तान इस बात से इनकार कर सकता है कि वित्तीय कार्रवाई कार्य बल ने 27 प्रमुख मापदंडों में से 20 से अधिक के उल्लंघन के लिए उसे नोटिस दिया है? और क्या प्रधानमंत्री इमरान ख़ान न्यूयॉर्क शहर में बैठे इस बात से इनकार करेंगे कि उन्होंने ओसामा बिन लादेन का खुला समर्थन किया था?” मैत्र ने पूछा।

मैत्र इस साल की शुरुआत में अमेरिकी शांति संस्थान में ख़ान की टिप्पणी का उल्लेख कर रही थीं। उन्होंने कहा कि ख़ान ने 2011 में पाकिस्तान के अंदर एक भयानक हमले में खूंखार आतंकवादी ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद “अपमानित” महसूस किया था।

पाकिस्तान
भारत के जवाब की लिखित प्रति का एक अंश

“मैंने यहाँ कभी भी आज से अधिक अपमानित महसूस नहीं किया। यह (अमेरिका) एक ऐसा देश था जो हमारा सहयोगी होने वाला था और हमारे सहयोगी ने हम पर भरोसा नहीं किया,” ऐसा इमरान ख़ान ने आतंकवाद के कारण अमेरिका के साथ पाकिस्तान के संबंधों में आई खटास और पाकिस्तान में घुस कर ओसामा बिन लादेन को मार गिराने की अमेरिकी कार्रवाई के सन्दर्भ में अमेरिका में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा था।

प्रथम सचिव ने यह भी पूछा कि क्या पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) प्रमुख (अपनी पार्टी में इमरान ख़ान का पद) इस बात को नकार सकते हैं कि उनका देश संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित 130 आतंकवादियों और 25 आतंकवादी संस्थाओं का घर है?

“अब जब कि प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षकों को पाकिस्तान में यह सत्यार्पित करने के लिए आमंत्रित किया है कि उस देश में कोई आतंकवादी संगठन नहीं हैं तो दुनिया उन्हें उस वादे के पालन के मापदंड पर तौलेगी,” मैत्र ने कहा।

विदेश मंत्रालय के प्रथम सचिव ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने न केवल के परमाणु ख़तरे की गीदड़ भभकी दी बल्कि कश्मीर में रक्तपात की चेतावनी भी दे डाली।

जब से नई दिल्ली ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को भंग करके जम्मू और कश्मीर की विशेष स्थिति को समाप्त किया है — जिससे राज्य दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू व कश्मीर और लद्दाख में विभाजित हो गया — तब से दोनों देश एक-दूसरे पर शब्दों के गोले बरसा रहे हैं। इस बीच ख़ान जो भी ज़ुबानी जमा-ख़र्च करे, सीमा और एलओसी (नियंत्रण रेखा) पर पाकिस्तान लगातार युद्धविराम का उल्लंघन करता आया है। यहाँ तक कि उसके सैनिकों ने हमेशा की तरह आतंकवादियों को भारत में घुसपैठ कराने की कोशिश में मदद भी की। इस महीने भी ऐसी कोशिशें हुईं जिसपर कल सिर्फ़ न्यूज़ ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की।

मैत्र ने कहा, “पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने ज़बरदस्त आतंकवाद और अपमानजनक घृणा फैलाने वाला भाषण दिया है जब कि भारत कश्मीर को विकास की मुख्यधारा में शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।”’

पीटीआई प्रमुख पर कटाक्ष करते हुए मैत्र ने कहा कि भारत के बारे में “किसी और को बोलने की आवश्यकता नहीं है — कम से कम उनको जिन्होंने नफ़रत की विचारधारा से आतंकवाद का उद्योग खड़ा किया है।”

मैत्र ने ख़ान को 1971 की पाकिस्तानी करतूत की भी याद दिलाई जहां उसने अपने ही लोगों का भीषण संहार किया था। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रथम सचिव ने कहा, “पीएम इमरान ख़ान नियाज़ी जी, नरसंहार आज के जीवंत लोकतंत्रों की पहचान नहीं हैं। हम आपसे अनुरोध करते हैं कि आप इतिहास की अपनी सीमित समझ को ताज़ा करें।”

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