Wednesday 25 May 2022
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नई सरकार से नीतीश सरकार की अपेक्षाएँ

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बिहार के जद(यू) सरकार ने केंद्र में बनने वाली भाजपा नेतृत्वाधीन एनडीए सरकार से अपनी अपेक्षाओं को सार्वजनिक किया है। अपने फ़ेसबुक पेज पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लिखा है —

“राष्ट्रीय गणतांत्रिक गठबंधन की यदि प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-56) से अब तक राष्ट्रीय औसत के अनुसार उद्व्यय का व्यय बिहार में किया गया होता, तो बिहार में करीब डेढ़ लाख करोड़ का अतिरिक्त निवेश होता। इसकी नीतिगत और समयबद्ध प्रतिपूर्ति ज़रूरी है।

ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना (2007-12) में जहाँ बिहार की औसत विकास दर (स्थिर मूल्य पर) 9.86% थी, वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था की औसत विकास दर 8.03% रही। इतने तेज़ विकास के बावजूद बिहार की प्रति व्यक्ति आय और राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति आय के बीच की खाई निरंतर बढ़ी है। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक एवं विभिन्न आर्थिक सेवाओं पर प्रति व्यक्ति ख़र्च में भी बिहार सबसे निचले पायदान पर है। हमारी युवा पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित हो इसके लिए बिहार को देश के समकक्ष लाना ज़रूरी है।

बिहार के लिए विशेष श्रेणी के राज्य का दर्जा की हमारी मुहीम आठ वर्षों से जारी है। हमारा संकल्प है कि विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त कर राज्य की जनता को बेहतर जीवन स्तर और रोज़गार के अवसर दिलाएंगे और विकास की इस लड़ाई को जीत कर ही दम लेंगे। केंद्र की नई सरकार से हमारी अपेक्षा है कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाए।

बिहार के विभाजन के समय योजना आयोग को ज़िम्मा सौंपा गया था कि एक कोषांग का गठन कर बिहार के deficit को चिन्हित कर इसे दूर करने का प्रावधान करे। नतीजतन बिहार को राष्ट्रीय सम विकास योजना (बाद में BRGF का नाम दिया गया) स्पेशल प्लान के तहत वर्ष 2002-03 में वार्षिक सहायता देने की शुरूआत की गयी। 12वीं पंचवर्षीय योजना में इस कार्यक्रम को जारी रखते हुए 4,000 करोड़ प्रतिवर्ष के दर से राज्य सरकार ने 20,000 करोड़ की मांग की जिसमें से केंद्र सरकार ने केवल 12,000 करोड़ को स्वीकृति दी। इसके आलोक में हम नई सरकार से अपेक्षा करते हैं कि हमारी नीतिसंगत मांग के अनुरूप बिहार को अतिरिक्त राशि दी जाएगी।

साथ ही बिहार में केंद्र की सरकार द्वारा direct चलाई जा रही योजनाओं में काफी धनराशि की आवश्यकता है। उदाहरणस्वरूप, रेलवे की अनेक परियोजनाएं हैं – 1997-98 में स्वीकृत दीघा में गंगा नदी पर बनाए जाने वाले पुल और मुंगेर में गंगा नदी के पुल की कुल प्राक्लित राशि 5283 करोड़ में से 60% ही व्यय हुई है। राज्य की सरकार ने इन योजनाओं में अपने अंश को ससमय दिया है पर केंद्र से समय पर राशि न आने से कार्य बाधित हो रहा है। रेलवे ने बिहार राज्य में चल रही अपनी योजनाओं के लिए बारह हज़ार करोड़ की अतिरिक्त राशि की मांग की है। नई सरकार से अपेक्षा है कि इन लंबित योजनाओं को तय राशि देकर शीघ्र पूरा किया जाएगा।

जहां राष्ट्रीय स्तर पर प्रति लाख जनसंख्या पर 322 किलोमीटर सड़कें हैं वहीं बिहार इसके 40% स्तर पर भी नहीं है। बिहार की सरकार ने लगातार पहल की है तब तो ये स्थिति है। हमने 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान अपने स्रोतों से national highway के रख-रखाव पर 1,000 करोड़ रूपये खर्च किए। अबतक राज्य को केंद्र ने ये राशि नहीं दी है। इसकी प्रतिपूर्ति शीघ्र की जानी चाहिए।

इसके साथ एक बात और है। किसी भी राज्य के युवा-युवतियां देश में कहीं भी जाकर रोज़गार और बेहतर जीवन स्तर के अवसर तलाशने के लिए स्वतन्त्र हैं। किन्तु कई राज्यों में इन्हें स्वीकार नहीं किया जाता जिससे असुरक्षा की भावना पैदा होती है। अतः हमारी अपेक्षा है कि नई सरकार क़ानून बनाएगी जो worker के जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

हमारी अपेक्षाओं का आधार है बिहार का विकास तथा देश में विकास की समानता। इसलिए हमारी अपेक्षा है कि नई सरकार बिहार को विशेषराज्य का दर्जा देगी, लंबित रेल परियोजनाओं और केंद्र की योजनाओं के लिए उपयुक्त राशि उपलब्ध कराएगी और साथ ही बिहार के तीव्र विकास के लिए विशेष पैकेज भी देगी।”

सार्वजनिक की गई इन मांगों में एक मांग ऐसी है जो खटकती है यह सच है कि भारत के हर नागरिक को जम्मू-कश्मीर के अलावा देश में कहीं भी बसने और रोज़गार का वसीला ढूँढने की आज़ादी है पर इस बात पर अलग से ज़ोर देकर जहां बिहार सरकार इस सच्चाई के प्रति संवेदनशील दिखी कि बिहार से लोग अन्य राज्यों में काम की तलाश में जाते हैं और कई प्रकार की यातनाएँ झेलते हैं, वहीं राज्य सरकार का निकम्मापन भी इससे झलकता है क्योंकि वह इन नागरिकों के लिए अपने ही राज्य में पर्याप्त मात्रा में आय के साधन मुहय्या करवाने में असमर्थ है

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Surajit Dasgupta
Surajit Dasgupta
Co-founder and Editor-in-Chief of Sirf News Surajit Dasgupta has been a science correspondent in The Statesman, senior editor in The Pioneer, special correspondent in Money Life, the first national affairs editor of Swarajya, executive editor of Hindusthan Samachar and desk head of MyNation

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