Wednesday 27 October 2021
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जन धन योजना के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री का भाषण

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स कार्यक्रम को मैं अभी देख रहा था। बहुत सी चीजें मैं अलग तरीके से देख रहा था। आपने देखा होगा, जिन्‍होंने ईनाम प्राप्‍त किया है, उनमें से ज्‍यादातर non-हिन्‍दी भाषी राज्‍य के लोग हैं और योजना का नाम उन्‍होंने हिन्‍दी में दिया है, देखिये national integration। दूसरा आपने देखा होगा कि जिनके खाते खोले गए, जो couple आए थे, सभी बहनें festival mood के कपड़ों में थीं। क्‍योंकि उन्हें यह इतना बड़ा हक मिला है, उनको यह बराबर समझ है। उनको पता है कि bank का खाता खुलेगा, खुद operate कर पाएंगी, पैसे वहां जमा होंगे, इससे उन्‍हें जीवन में कितनी बड़ी सुरक्षा मिलेगी। उसके लिए इससे बड़ा कोई festival मूड हो ही नहीं सकता है।

यह आज खुशी की बात है कि आज बहुत सारे record break हो रहे हैं। शायद insurance company के इतिहास में एक ही दिन में डेढ़ करोड़ लोगों का अकस्‍मात बीमा, दुर्घटना बीमा, 1,00,000 रुपये प्रति व्‍यक्ति का, शायद insurance company के जनमत से आज तक कभी नहीं हुआ होगा। यह अपने आप में एक बहुत बड़ा record है। Banking क्षेत्र के इतिहास में भी एक दिवस में डेढ़ करोड़ नागरिकों का खाता खुलना, यह शायद banking इतिहास का एक बहुत बड़ा record होगा।

और इससे सबसे बड़ा फायदा यह होने वाला है कि जो सरकार में बैठे हैं, भिन्‍न भिन्‍न विभागों में काम कर रहे हैं, उनका भी विश्‍वास प्रस्‍थापित होने वाला है। आज के बाद जो हम तय करें, वह हम कर सकते हैं और शासन चलता है शासन व्‍यवस्‍था में जुड़े हुए लोगों के विश्‍वास पर। उनको अपने पर विश्‍वास हो कि हाँ, यह कर सकते हैं। यह एक ऐसा achievement है जो सिर्फ banking sector को नहीं, शासन व्‍यवस्‍था में जुड़े हुए हर व्‍यक्ति के विश्‍वास को अनेक गुना बढ़ा देगा। और इस कारण भविष्‍य में जब भी कोई योजना पर, इस प्रकार का mission mode में काम करना होगा तो हम बहुत आसानी से कर पाएंगे, यह विश्‍वास आज प्रस्‍थापित हुआ है।

भारत सरकार की परंपरा में भी शायद एक साथ 77,000 places पर simultaneous कार्यक्रम एक साथ होना, इस प्रकार से एक व्‍यवस्‍था को विशिष्‍ट कार्य के लिए organise करना, एक साथ सभी राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों को लेकर के इतना बड़ा कार्यक्रम करना, ये भी अपने आप में भारत सरकार के लिए एक पहला अनुभव है। वरना circular जाते हैं, meeting होती है, फिर जानकारी आती है तब तक कि अच्‍छा नहीं हुआ? तो ठीक है, फिर से करना है। इन सारी परंपराओं से हट कर इतना बड़ा achieve करना, यह सरकार के लिए, सरकारी व्‍यवस्‍था के लिए, एक सुखद अनुभव है। और यह बात सही है कि सफलता नई सिद्धियों को पाने की प्रेरणा बन जाती है। सफलता नई सिद्धियों का गर्भाधान करती है। और ये सफलता देश को आगे ले जाने के अनेक जो प्रकल्‍प हैं, उसको एक नई ताकत देगी। यह आज के इस अवसर से मुझे लग रहा है। इसको सफल करने वाले वित्‍त विभाग के सभी बंधु, सरकार के सभी बंधु, banking क्षेत्र के लोग, सभी राज्‍य सरकारें, ये सब अभिनंदन के अधिकारी हैं और हम सब मिल कर के किसी एक को पाना चाहें तो कितनी आसानी से पा सकते हैं, यह हमें ध्‍यान में आता है।

आप कल्‍पना कर सकते हैं, 1969 में जब बैंकों को nationalisation किया गया, राष्‍ट्रीयकरण किया गया, तब कैसे कैसे सपने बोये गए थे। उस समय के सारे विधान निकालिये, सारे बैंकों का राष्‍ट्रीयकरण गरीबों के लिए होता है, ऐसा पूरे देश के गले उतार दिया गया था। लेकिन आजादी के 68 year के बाद, 68 per cent लोगों के पास भी अर्थव्‍यवस्‍था के इस हिस्‍सा से कोई संबंध नहीं है और इसलिए लगता है कि जिस मकसद से इस काम का प्रारंभ हुआ था, वह वहीं की वहीं रह गई (sic)। मैं यह मानता हूं कि जब कोई व्‍यक्ति bank में खाता खोलता है, तो अर्थव्‍यवस्‍था की जो एक मुख्‍य धारा है, उस धारा से जुड़ने का उस का एक पहला कदम बन जाता है।

आज 1,50,00,000 परिवार या व्‍यक्ति, जो भी जुड़े हैं, वे अर्थव्‍यवस्‍था की मुख्‍यधारा में अपना पहला कदम रख रहे हैं। यह अपने आप में देश की आर्थिक व्‍यवस्‍था को गति देने के लिए एक महत्‍वपूर्ण सफलता है। आजादी के इतने साल के बाद और जो देश के गरीबों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है, और गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने में अर्थव्‍यवस्‍था सबसे महत्‍वपूर्ण इकाई होती है। अगर उससे वह अछूत रह जाए, मुझे यह शब्‍द प्रयोग करना अच्‍छा तो नहीं लगता, पर मन करता है कि कहूँ यह financial untouchability है। देश के 40 प्रतिशत लोग, जो भारत की अर्थव्‍यवस्‍था के हकदार नहीं बन पाते, उसके लाभार्थी नहीं बन पाते, तो हम फिर गरीबी को हटाने के काम में सफल कैसे हो सकते हैं। और इसलिए हमारा मकसद है, अगर महात्‍मा गांधी ने सामाजिक छुआछूत को मिटाने का प्रयास किया, हमें गरीबी से मुक्ति पानी है, तो हमें financial untouchability से भी मुक्ति पानी होगी। हर व्‍यक्ति को financial व्‍यवस्‍था से जोड़ना होगा और उसी के तहत इस अभियान को पूरी ताकत के साथ उठाया है।

आज भी गाँव के गरीब परिवारों में जब जाते हैं तो देखते हैं कि माताएँ-बहनें बहुत मेहनत करके पैसे बचाती हैं। लेकिन उसको हर बार परेशानी रहती है, अगर पति को बुरी आदतें लगी हैं, व्‍यसन की आदत लग गई है, तो उस महिला को चिंता लगी रहती है कि शाम को पैसे कहां छुपायें, कहां रखें, बिस्‍तर के नीचे रखें, वह ढ़ूंढ के निकाल के लेकर के बैठ जाता है, उसको नशे की आदत लगी है। जब खाता खुल जाएगा तो महिलाओं का कितना आशीर्वाद मिलेगा हमलोगों को। इसलिए बैंकिंग सेक्‍टर के जिन महानुभावों ने इस काम को किया है, आपने 20 साल की नौकरी की होगी, 25 साल की नौकरी की होगी, आपने बड़े-बड़े multi-millionaires के खाते खोले होंगे, उनको पैसे दिये होंगे, लेकिन आशीर्वाद पाने की घटना आज हुई है। वह महिला जब खाता खोलेगी, आपको आशीर्वाद देगी और आपके जीवन में सफलता प्राप्‍त होगी। यह छोटा काम नहीं किया है आपलोगों ने। यह एक ऐसा काम किया है, जिसमें लाखों लोगों, लाखों गरीब माताओं के आपको आशीर्वाद आपको मिलने वाला है।

यह कैसी व्‍यवस्‍था हमने विकसित की है, मैं किसी को दोष नहीं देता हूँ, मैं आत्‍मचिंतन कर रहा हूँ। यह कैसी व्‍यवस्‍था हमने विकसित की है कि इस देश का अमीर व्‍यक्ति कम से कम ब्‍याज पर धन पा सकता है। बैंक उसके business house पर जा करके, कतार लगा करके खड़ी होती है कि आप हमारे साथ business कीजिए। Business के लिए यह आवश्‍यक होगा। वह कोई गलत करते हैं, ऐसा मैं नहीं कह रहा हूँ, लेकिन यही स्थिति है और जो गरीब हैं, जिनको कम से कम ब्‍याज पर पैसा मिलना चाहिए, वह अमीर से 5 गुना ब्‍याज पर पैसे लेता है। उस साहूकार से पैसे लेता है, और उसके कारण उसका शोषण भी होता है, exploitation होताहै। हर प्रकार से उसके जीवन में संकट पैदा होने के कारण संकट की शुरूआत हो जाती है। एक बार साहूकार से पैसे लिए तो कभी वह उसके चंगुल से मुक्‍त नहीं हो पा रहा है। कर्ज में डूबा हुआ वह व्‍यक्ति आत्‍महत्‍या की ओर चला जाता है। परिवार तबाह हो जाता है। क्‍या, इस देश की इतनी बड़ी banking व्‍यवस्‍था, इतनी बडी financial system, उसका दायित्‍व नहीं है, इस विष-चक्र से गरीबों को मुक्ति दिलाये?

आज गरीबों की विष-चक्र से मुक्ति का, आजादी का, मैं पर्व मना रहा हूँ। 15 अगस्‍त को जिस योजना की घोषणा की, 15 दिन के भीतर भीतर योजना को लागू किया, और आज 1,50,00,000 परिवारों तक पहुँचने का काम सफलतापूर्वक पूरा हुआ। आगे चल कर के उसकी विश्‍वसनीयता बनेगी, banking व्‍यवस्‍था में विश्‍वसनीयता बनेगी। उसके कारण banking sector भी expand होने वाला है। कई नई branch खुलेंगी। कई उसके नए agent तय होंगे। लाखों नौजवानों को इसके कारण रोजगार मिलने वाला है। इस व्‍यवस्‍था को आगे बढ़ाने के लिए स्‍थायी व्‍यवस्‍था विकसित होगी। 2,000 से ऊपर की जनसंख्‍या वाले जितने गांव हैं, वहाँ कोई न कोई banking दृष्टि से काम आएगा। Even , आज email के जमाने में, SMS के जमाने में, postal के क्षेत्र की गतिविधियां कम हुई है, लेकिन उसकी व्‍यवस्‍थाएं तो वैसी की वैसी हैं। उन व्‍यवस्‍थाओं का उपयोग banking sector के लिए किया जाएगा। इन गरीबों के लिए किया जाएगा। तो उसके कारण अपने आप ऐसी व्‍यवस्‍थाएं मिलेंगी, जिन व्‍यवस्‍थाओं के कारण गरीब को गरीबी के खिलाफ लड़ने के लिए बहुत बड़ी ताकत मिलने वाली है और हम सब मिल कर के, गरीबी के खिलाफ लड़ते हैं तो गरीबी से मुक्ति मिल सकती है, यह मेरा पूरा विश्‍वास है।

हम हमेशा कहते हैं कि भई, सरकार हो, सरकार की संपत्ति हो, वह गरीबों के लिए है। लेकिन आज वह शब्‍दों में नहीं, वह हकीकत में परिवर्तित हो रहा है। उसके कारण आगे चल कर के bank से उसको 5,000 रुपये तक का कर्ज मिलेगा और सामान्‍य मानव को इससे ज्‍यादा कर्ज की आवश्‍यकता नहीं पड़ती है। उसको अपने रोजमर्रा के काम के लिए चाहिए और अनुभव यह है, गरीब व्‍यक्ति जो bank के अंदर आता है, 99 per cent वह समय से पहले पैसे जमा कराता है। वह बेचारा हमेशा डरता रहता है। उसमें यदि बहनों के पास हो तो वह 100 per cent payment कर देती हैं। ये banking sector के लोगों का अनुभव है और बड़े-बड़े लोग? हमें मालूम है, क्‍या होता है और इसलिए यह सारा प्रयास गरीबों के लिए है। गरीबी से मुक्ति चाहने वालों के लिए एक अभियान का हिस्‍सा है। और उसी के लिए उसको आगे बढाया जा रहा है।

किसी काम को जब तक समय सीमा में बांध कर निर्धारित लक्ष्‍य को पाने का प्रयास नहीं किया जाए और पूरी शक्ति से उसमें झोंक न दिया जाए, तो परिणाम नहीं मिलते और एक बार breakthrough हो जाए तो गाड़ी अपने आप चलने लग जाती है। आज के इस breakthrough के बाद मैं नहीं मानता हूं कि यह रूकने वाला है। शुरू में जैसे वित्‍त मंत्री जी कहते थे, 2015 अगस्‍त तक का समय चल रहा था। मैंने कहा, भाई इस झंडावंदन से अगले झंडावंदन तक में हम को काम करना है। 15 अगस्‍त को झंडावंदन किया और योजना घोषित की। 26 जनवरी तक इसे पूरा करें हम। 15 अगस्‍त 2015 तक क्‍यों इंतजार करें? और मैं वित्‍त विभाग का आभारी हूँ, इस department के सभी अधिकारियों का आभारी हूं, banking sector का आभारी हूं कि उन्‍होंने बीड़ा उठा लिया है और उन्‍होंने मुझे वादा किया है कि हम जनवरी 26 पहले इस काम को पूरा कर लेंगे।

आज जो RuPay में जो credit card मिल रहा है इन 1,50,000 लोगों को, हम दुनिया के जो popular visa card वगैरह हैं, उससे परिचित हैं, जो विश्‍व में चलता है। क्‍या हम लोगों के इरादा नहीं होना चाहिए क्‍या कि हमारा RuPay card दुनिया के किसी भी देश में चल सके, इतनी ताकत हमारी होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? उसकी इतनी credibility होनी चाहिए। होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? आज से इस event के बाद उसकी पूरी संभावना पैदा होगी। इस देश के 1,50,000 लोग होंगे, जैसे अमीर लोग कई बड़े restaurant में जाते हैं, तो खाना खाते हैं तो अपना card देते हैं ओर वो कार्ड में से debit होताहै। अब मेरे गरीब के पास भी वो कार्ड होगा। वह भी अपना debit करवाएगा, कोई सब्‍जी बेचता होगा। देखिए अमीर और गरीब की खाई भरने का कितना बड़ा initiative है ये। आज गरीब आदमी भी अपने हाथ में भी mobile होता है तो वो दूसरे के बराबर, अपने को समझता है। उसके पास भी mobile और मेरे पास भी mobile है। अब वो, उसके पास भी card है और मेरे पास भी card है, इस मिजाज से काम करेगा। एक मनोवै‍ज्ञानिक परिवर्तन इससे आता है। आखिरकर मानसिक रूपसे पक्‍का कर ले, हाँ मैं किसी की भी बराबरी कर सकता हूं, आगे बढ़ने में कोई रोक नहीं सकता इसको। वो आगे बढ सकता है। इसलिए special scheme और भी जोड़ रहे हैं हम आज। हम 26 जनवरी तक, जिसमें आज जो 1,50,000 लोगों ने किया है, उनका भी समावेश होगा, 26 जनवरी तक जो लोग अपने खाते खुलवाएंगे, उनको 1,00,000 रुपये का दुर्घटना बीमा के अलावा 30 हजार रुपये का life insurance भी मिलेगा। जो परिवार में कोई बीमार हुआ, कोई जरूरत पड़ी तो उनको काम आएगा। 26 जनवरी तक ये लाभ मिलेगा। गरीब परिवार को 1,00,000 रुपये की व्‍यवस्‍था, किसी भी गरीब के लिए काम आएगी। उसके परिवार के लोगों को काम आएगी। कभी कभी ये बहुत से बातें, बड़े लोगों को समझ नहीं आती हैं, लेकिन सामान्‍य मानव तेजी से पकड़ता है।

जब 15 अगस्‍त को लाल किले से मैंने एक बात को कहा तो दूसरे दिन ज्‍यादा उसकी चर्चा सुनी नहीं। शाम में TV debate में भी उसको सुना नहीं। लेकिन मुझे एक दो सज्‍जन मिलने आए तो उन्‍होंने कहा कि मेरा driver बहुत खुश है, मैंने कहा क्‍यों, उसने कहा मोदी जी ने एक लाख रुपये का insurance दे दिया। गरीब आदमी को चीजों की कितनी समझ है, कितनी तेजी से वह चीजों को पकड़ता है, उसका एक उदाहरण है। विधिवेत्‍ताओं को शायद पता नहीं होगा 1,00,000 का इंश्‍योरेंस दिया गया है वह बहुत बड़ी योजना है। हिन्‍दुस्‍तान के एक driver, एक गरीब आदमी को पता है, उसके भाग्‍य को बदलने की शुरूआत 15 अगस्‍त को तिरंगा झंडा फहराने के साथ हुई है, यह बात उस तक पहुंच गई है। यही चीजें हैं जो कि बदलाव लाती है। और बदलाव लाने की दिशा में हमारा प्रयास है।

हमारे यहां शास्‍त्रों में ऐसा कहा गया है “सुखस्‍य मूलम् धर्म, धर्मस्‍यमूलम् अर्थ, अर्थस्‍य मूलम् राज्‍यम्”। यानी सुख के मूल में धर्म यानी आचरण, लेकिन धर्म के मूल में आर्थिक, economical stability है। economical stability के मूल में राज्‍य का दायित्‍व है। यह राज्‍य की ज़िम्मेवारी है, financial inclusion की। यह चाणक्‍य से भी पहले हमारे पूर्वजों ने कहा हुआ है और इस लिए राज्‍य अपना दायित्‍व निभाने का प्रयास कर रहा है कि जिसमें सामान्‍य व्‍यक्ति की भी अब आर्थिक स्थिति सामान्‍य होगी तो उसके जीवन के अंदर सुख और संतोष की स्थिति तक वह पहुंच जाएगा। इसलिए अब हमलोगों का प्रयास है और मैं मानता हूँ कि आज जो योजना का आरंभ हुआ है, नौजवानों को रोजगार की संभावनाएं बढ़ने वाली है। गरीब आदमी के हाथ में पैसा आएगा, बचेगा अपने आप में।

जैसा वित्‍त मंत्री जी कहते थे, आने वाले दिनों में जो individual schemes हैं उसका सीधा सीधा लाभ इन बैंक अकाउंट में जाएगा तो भ्रष्‍टाचार के खिलाफ जो लड़ाई है, उसमें एक बहुत बड़ा उपयोगी शस्‍त्र बनने वाला है। जो भ्रष्‍टाचार के खिलाफ भी लड़ने की ताकत देगा। बैंक में खाता, वैसे हमारे खास करके हिन्‍दुस्‍तान और ज्‍यादातर एशियन कंट्रीज में, सदियों से हमलोगों का एक स्‍वभाव रहा है, हमारे संस्‍कार रहे हैं, वह संस्‍कार है, बचत। दुनिया के बाकी देशों में यह प्रकृति नहीं है। वहां तो “ऋणम् कृत्‍वा, घृतम् पीवेत”, कर्ज कर के घी पीओ। अब वो घी पीते नहीं, जो पीतें हैं वह पीते हैं। लेकिन यह गलत है। हमारे यहां परंपरा रही है, saving की। और हमारे देश की ऐसी विशेषता खास Asian countries की ऐसी रही है। कि अपना ही सोचना ऐसा नहीं है, अपने बच्‍चों का भी सोचना, आने वाली पीढ़़ी का सोचना, यह हमारी सदियों क परंपरा रही है। ऐसा नहीं कर्ज करो और जियो बाद में, जो आएगा वह भुगतेगा, वह करेगा। Credit card के भरोसे जीने वाले हमलोग नहीं हैं। स्‍वभाव से saving हमारी प्रकृति रही है, और उसके कारण banking व्‍यवस्‍था अपने आप में एक लाभ है।

लेकिन बैंकों की स्थिति क्‍या है, मैं अपने जीवन की एक घटना सुनाना चाहता हूँ। मैं मेरे गांव मे स्‍कूल में पढ़ता था, और देना बैंक के लोग हमारे स्‍कूल में आए थे। तो देना बैंक के लोग वो कोई Mr वोरा करके थे। मुझे इतना याद है कि सबको समझा रहे थे, गुल्‍लक देते थे, पैसा बचाना चाहिए, बच्‍चों को पैसा बचाना चाहिए वगैरह वगैरह। खाता खोलते थे, हमने भी खुलवा दिया था, हमको भी एक गुल्‍लक मिला था। लेकिन हमारा गुल्‍लक में कभी एक रुपया पड़ा नहीं। क्‍योंकि हमारा वह background नहीं था कि हम वो कर पायें। अब खाता तो खुल गया, हम ने स्‍कूल छोड़ दिया, हम ने गांव छोड़ दिया, हम बाहर भटकने चले गए, तो bank वाले मुझे खोज रहे थे। शायद उन्‍होंने मुझे 20 सालतक खोजा, कहां हैं ये? और क्‍यों खोज रहे थे? खाता बंद करवाने के लिए। वह बोले भई, हर साल तुम्‍हारे खाते को carry forward करना पड़ता है। कागजी कार्रवाई इतनी करनी पड़ रही है, तुम मुक्ति दो हमको। बाद में बताया गया कि मुझे खोजा जा रहा है, तो मैंने बाद में उन्‍हें मुक्ति दे दी।

तो वह एक समय था जब खाता बंद करवाने के लिए भी कोशिश की जाती थी। आज खाता खोलने के लिए कोशिश हो रही है। मैं मानता हूँ, यहीं से, यहीं से गरीबों की जिंदगी के सूर्योदय का आरंभ होता है। मैं इस काम को करने वाले banking sector के लोगों को बधाई देता हूं। और आज, मैंने एक चिट्ठी लिखी थी, करीब 7,00,000 लोगों को अभी मैंने एक email भेजा था, शायद यह भी किसी प्रधानमंत्री को यह काम पहली बार करने का सौभाग्‍य मिला होगा। Bank के सभी व्‍यक्तियों को यह चिट्ठी गई है और मैंने इनसे आग्रह किया है कि यह बहुत बड़ा पवित्र और सेवा का काम है। इसको हमने करना है और सबने इसको किया।

इस बात को जिस प्रकार से banking sector के प्रत्‍यक्ष कार्य करने वाले लोगों ने उठा लिया है, मैं हृदय से उनका अभिनंदन करता हूँ और मैं आशा करता हूँ कि हमें 26 जनवरी तक इंतजार नहीं करना पड़े और 26 जनवरी से पहले हम लक्ष्‍य को प्राप्‍त करें, और देश में जो आर्थिक छुआछूत का जो एक माहौल है उससे मुक्ति दिलायें और ब्याज के दुष्‍चक्र की वजह से आत्‍महत्‍या की ओर जा रहे उन परिवारों को बचायें और उनके जीवन में भी सुख का सूरज निकले, इसके लिए प्रयास करें।

इसी अपेक्षा के साथ सबको बहुत बहुत धन्‍यवाद, सबको बहुत बहुत शुभकामनाएँ।

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