चुनाव अभियान के दौरान वीआईपी सुरक्षा के लिए किया गया इतना इंतज़ाम

राजनेताओं (VIP और VVIP) की सुरक्षा के लिए 2,000 से अधिक कमांडो तैनात किये गए जिनमें 120 पर्यवेक्षी अधिकारी थे; ख़ुफ़िया विभाग अलग

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नई दिल्ली | भारत में दो महीने तक चलने वाला चुनावी अभियान शायद ही सुचारू रूप से चलता हो। राजनेताओं की सुरक्षा के लिए 2,000 से अधिक कमांडो तैनात किये जाते हैं जिनमें 120 पर्यवेक्षी अधिकारी होते हैं। सुरक्षाकर्मी अपनी बंदूकें हजारों बुलेट राउंड से लोडेड रखते हैं। इनके साथ खुफिया जानकारी के तमाम दस्तावेज़ होते हैं और प्राथमिक चिकित्सा किट भी साथ रखना पड़ता है।

मौजूदा चुनाव के दौरान देश भर में प्रचार करने वाले राजनेताओं की हर दिन की वीआईपी सुरक्षा कवच सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी इन केंद्रीय बलों की होती है।

हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अभिजात एसपीजी द्वारा संरक्षित हैं, अन्य प्रमुख राजनेताओं को एनएसजी, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ और आईटीबीपी जैसे केंद्रीय बलों द्वारा संरक्षित किया जाता है क्योंकि वे प्रत्येक दिन हजारों किलोमीटर की यात्रा करते हैं।

“कुल मिलकर लगभग 2,000 कमांडो इस वक़्त तैनात हैं और शिफ्ट में उनकी ड्यूटी बदलती है, इसके अलावा 120 युवा अधिकारियों को राजनेताओं को सुरक्षा कवर प्रदान करना होता है। रसद, हथियार और खुफिया और परिचालन दस्तावेज़ — ये साड़ी चीज़ें तैयार रखनी होती है जब हर दिन देश में प्रचार के लिए टीमें अपने-अपने वीआईपीज़ के साथ निकलती हैं,” वीआईपी सुरक्षा तंत्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा।

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को 78 प्रमुख राजनेताओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिनमें भाजपा अध्यक्ष अमित शाह शामिल हैं, जो उनकी शीर्ष श्रेणी ‘जेड +’ सुरक्षा कवर के तहत आते हैं।

शाह के लिए एक अग्रिम सुरक्षा संपर्क एसपीजी सुरक्षाकर्मियों की तर्ज पर किया जाता है। उन्होंने बुधवार को कहा कि कोलकाता में अपने रोड शो के दौरान उनके काफिले पर हमले से बच पाना उनके लिए मुश्किल होता यदि सीआरपीएफ का कवर नहीं होता।

बल ने गंभीर सुरक्षा खतरों का सामना करने वाले शाह द्वारा देश भर में कवर किए जाने वाले स्थानों की अग्रिम निगरानी के लिए सहायक कमांडेंट और डिप्टी कमांडेंट के रैंक के अधिकारियों की एक टीम बनाई है।

सीआरपीएफ के साथ-साथ नजर रखने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे 54 से अधिक प्रमुख सुरक्षा अधिकारियों को तैनात किया गया है। विशेष कार्य के लिए सक्रिय बल के 28 विभिन्न ठिकानों से जमीनी इकाइयों द्वारा मदद की जाती है।

देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल के ये कमांडो केंद्रीय मंत्रियों नितिन गडकरी और रविशंकर प्रसाद को भी सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं। ये जवान भीड़ नियंत्रण और विशेष परिस्थितियों का सामना करने के लिए AK राइफ़ल्स, MP5 असॉल्ट राइफ़ल्स, लोडेड मैगजीन, पिस्तौल, मोबाइल बॉडी कवच और यहां तक कि रस्सियों और लाठी से लैस होते हैं।

नोएडा में CRPF बेस पर एक 24X7 कंट्रोल रूम नॉर्थ ब्लॉक में गृह मंत्रालय के एक समान परिचालन केंद्र के साथ लगातार संपर्क में रहता है जो इन टीमों को ले जाने वाले हर क़दम का समन्वय करता है और वायरलेस और मोबाइल पर उनके साथ नियमित संपर्क में रहता है।

अधिकारी ने कहा, “वीआईपी सुरक्षा तेज रिफ्लेक्स और साहस का खेल है। वीआईपी सुरक्षा कार्य का प्रतिपादन करते समय बहुत सावधानी बरतनी पड़ती है क्योंकि इस काम में चूक होने पर कोई दूसरा मौका नहीं मिलता।”

स्थानीय इलाकों से आने वाले कमांडो को भी इन वीआईपी के साथ कई बार प्रतिनियुक्त किया जाता है ताकि वे भीड़ से उभरने वाले हर बड़बड़ाहट या आवाज को पकड़ सकें।

अधिकारी ने कहा कि वे चोट, मोशन सिकनेस या थकान की स्थिति में वीआईपी की मदद के लिए प्राथमिक चिकित्सा किट भी ले जाते हैं।

जिस बल को 93 VIP लोगों की सुरक्षा सौंपी गई है, उस केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) का काम कठिन है क्योंकि हाल ही में इसे पश्चिम बंगाल में एक दर्जन से अधिक नए लोगों की सुरक्षा के लिए कहा गया है, जिनमें से अधिकांश नेता चुनावों में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

रैली के मैदान से बाहर होने वाली घटनाओं पर नज़र रखने के लिए लगभग 40 सुरक्षा अधिकारियों को पर्यवेक्षी भूमिकाओं में तैनात किया गया है।

अधिकारी ने कहा कि वे स्थानीय क्षेत्र में शिविर लगाते हैं और कमांडो की तैयारियों, रसद, भोजन और अन्य आवश्यकताओं को सुनिश्चित करते हैं।

CISF कवर के तहत प्रमुख वीआईपी हैं आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत (Z +), मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ (Z), मोदी के कैबिनेट में राज्य मंत्री महेश शर्मा और मनोज सिन्हा, पूर्व IPS अधिकारी और भाजपा नेता भारती घोष और बंगाल में पार्टी के अन्य लोकसभा उम्मीदवार।

CISF VIP सुरक्षा इकाई में विशेष रूप से प्रशिक्षित कर्मी होते हैं और उन्हें विशेष सुरक्षा समूह (SSG) कहा जाता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) को अब केवल 13 VIP लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखना पड़ता है जब कि यह संख्या पहले इससे कहीं अधिक थी। इनमें केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री जैसे अखिलेश यादव और मायावती और योगी आदित्यनाथ और एन चंद्रबाबू नायडू जैसे सेवारत मुख्यमंत्री शामिल हैं।

लोकसभा चुनाव घोषित होने से पहले एनएसजी ने अपने सुरक्षा अभ्यास पूरे कर लिए थे और ‘ब्लैक कैट’ अब स्मार्ट संचार उपकरणों, बॉडी आर्मर शील्ड्स से लैस है।

अधिकारी ने कहा कि वे गृह मंत्री और अन्य लोगों की तरह कुछ वीआईपी लोगों के लिए कार्यक्रम स्थल का अग्रिम निरीक्षण करते हैं।

“कमांडो टीमें पहले से तैनात होती हैं जब वीआईपी एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए एक उड़ान या हेलीकॉप्टर लेता है। जब एक टीम वीआईपी को ‘बिंदु क’ पर सुरक्षित रूप से छोड़ देती है, दूसरी टीम उसे ‘बिंदु ख’ पर रिसीव करने के लिए तैयार होती है,” अधिकारी ने बताया। उन्होंने कहा कि इन टीमों के साथ अच्छी संख्या में वीआईपी सुरक्षा प्रशिक्षित चालक तैनात किए गए हैं क्योंकि वे यूनिट के बहुत महत्वपूर्ण सदस्य हैं। वे किसी हमले, घात या बमबारी की घटना के मामले में तेजी से कार्रवाई कर सकते हैं और सुरक्षाकर्मी को बाहर कर सकते हैं।

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल की जिम्मेदारियां हैं भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी (जेड +), जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती जैसे 16 वीआईपी।

सात चरण का चुनाव 19 मई को अंतिम मतदान के दिन के साथ समाप्त होगा और मतों की गिनती 23 मई को होनी है।

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