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Sunday 15 December 2019
Economy उद्योग व व्यवसाय को आसान बनाने के लिए सरकार...

उद्योग व व्यवसाय को आसान बनाने के लिए सरकार द्वारा किए गए पहल

English translation follows the part in Hindi.


 

सुदृढ़ विनिर्माण (manufacture) क्षेत्र का विकास सरकार की प्राथमिकता है। इसमें न केवल आर्थिक वृद्धि को तीव्र करने की बल्कि‍ रोज़गार प्रदान करने की भी क्षमता है। सरकार सभी प्रकार की कठिनाइयों को दूर करने और भारत को विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस दिशा में सरकार ने कई उपाय किए हैं।

विगत 3 माह के दौरान आर्थिक गतिविधि बढ़ी है जैसा कि सकल घरेलू उत्‍पाद की तिमाही वृद्धि आंकड़ों में लक्षित है, जो विगत वर्ष की अप्रैल-जून की अवधि की तुलना में इसी अवधि की 2014 की पहली तिमाही में बढ़कर 5.7% हो गई (सीएसओ अनुमान पर आधारित)। सामान्‍यत: औद्योगिक वृद्धि और विशेषत: विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि में महत्‍वपूर्ण सुधार हुआ है तथा इन क्षेत्रों में 2013-14 की इसी अवधि में नकारात्‍मक वृद्धि दर की तुलना में सकारात्‍मक वृद्धि दर रही। सकल निर्धारित पूंजी निर्माण (Gross fixed capital formation — GFCF), जो कि निवेश का संकेतक है, 2014-15 की पहली तिमाही में 7%बढ़ा जबकि विगत वर्ष की पहली तिमाही में GFCF की वृद्धि दर नकारात्‍मक थी। यह निवेशकों की अच्‍छी मनःस्‍थिति को दर्शाता है और भविष्‍य में वृद्धि की संभावना का अच्‍छा संकेत है। यह स्‍पष्‍ट सुधार अच्‍छे व्‍यवसायिक वातावरण और बाज़ार भावना की एक झलक है। जुलाई और अगस्‍त 2014 की HSBC के Purchasing Managers’ Index (PMI) रिपोर्ट तथा National Council of Applied Economic Research (NCAER) द्वारा हाल ही में प्रकाशित व्‍यवसायिक आत्‍मविश्‍वास सूचकांक इन सकारात्‍मक व्‍यवसायिक स्थितियों को सिद्ध करते हैं।

पिछले 3 महीनों में आर्थिक कार्यनिष्‍पादन में यह स्‍पष्‍ट सुधार बेहतर व्‍यवसाय वातावरण तथा बाज़ार भावना की एक झलक है जो कि सरकार द्वारा सामान्‍य रूप से औद्योगिक क्षेत्र और विशेष रूप से विनिर्माण क्षेत्र के पुनरुत्‍थान के लिए सकारात्‍मक परिवर्तन लाने हेतु उठाई गई विभिन्‍न पहलों का परिणाम माना जा है। इस दिशा में संघीय बजट 2014-15 में पहले ही कुछ घोषणाएँ की गईं थीं।

भारत में व्‍यवसाय करने के लिए समर्थकारी और सहायक वातावरण उपलब्‍ध करवाना औद्योगिक वृद्धि में योगदान करने वाला एक महत्‍वपूर्ण कारक है। सरकार का ज़ोर प्रक्रियाओं के सरलीकरण, मौजूदा नियमों के यौक्तिकरण और सूचना प्रौद्योगिकी के अधिक उपयोग पर रहा है ताकि शासन को अधिक कुशल, प्रभावी, सरल और प्रयोक्‍ता अनुकूल बनाया जा सके। भारत में व्‍यवसाय करने की आसानी के लिए की गई पहलें अनुबंध में दी गई हैं।

संपादक सुरजीत दासगुप्ता की टिप्पणी
SD1कांग्रेस का यह कहना कि भाजपा के नेतृत्व वाली NDA सरकार केवल UPA सरकार के कामों को आगे बढ़ा रही है अर्द्ध सत्य है। जिन कार्यक्रमों के लिए एक सरकार धनराशि मुहय्या करवाती है उन्हें अगली सरकार यकायक समाप्त नहीं कर सकती। इसके अलावा किसी कार्य का श्रेय लेने से पहले कांग्रेस को सोचना चाहिए कि उसके ज़माने में वह काम पूरा क्यों नहीं हो सका। नई सरकार के लिए यह संभव न था कि किसी काम को शुरू करे और 3 माह के अन्दर-अन्दर उसे पूरा कर उसे राष्ट्र को समर्पित भी कर दे। अर्थात इनके पूरे होने में जो रास्ते के रोढ़े थे उन्हें नरेन्द्र मोदी सरकार ने फुर्ती के साथ हटाए। अगर ये सारी परियोजनाएँ अप्रैल तक पूरी हो चुकी होतीं और पूर्व प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह के हाथों ये प्रकल्प उद्घाटित होते तो शायद पिछली सरकार के प्रति लोगों का विश्वास इतना कम न हुआ होता और चुनाव में कांग्रेस की इतनी बुरी हार न होती। ऐसे में यदि कांग्रेस किसी को कोसना चाहती है तो अपनी शासन-प्रणाली के पक्षाघात — policy paralysis — को कोसे। आम जनता नई सरकार से नई नीतियों के विमोचन की आशा तब लगा सकती है जब पुरानी सरकार द्वारा निष्क्रिय कर दी गई व्यवस्था को नई सरकार दोबारा सक्रिय कर ले। इसकी शुरुआत अगली बजट से होगी — ऐसा अनुमान वास्तविकता से नज़दीक होगी।

प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश (FDI) एक महत्‍वपूर्ण संसाधन है, अतः सरकार ने देश में और अधिक FDI अन्‍तर्वाह आकृष्‍ट करने के लिए कई क़दम उठाए हैं — रक्षा क्षेत्र में FDI नीति को उदार बना दिया तथा FDI सीमा को 26% से बढ़ाकर 49% कर दिया। विनिर्दिष्‍ट रेल अवसंरचना परियोजनाओं में निर्माण, संचालन और अनुरक्षण कार्य में स्‍वतः रूट से 100% FDI की अनुमति दी गई। निर्माण विकास क्षेत्र में FDI के मानदंडों को आसान बनाया जा रहा है। जून और जुलाई 2014 में FDI अंतर्वाह विगत वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 75% बढ़ गया।

औद्योगिक गलियारों और औद्योगिक समूहों के विकास की गति कई पहलों के साथ तेज रही—

  • सभी औद्योगिक गलियारों के औद्योगिक गलियारा विकास के सभी केंद्रीय प्रयासों को कार्यान्‍वित करने और समन्‍वय करने, परियोजना विकास गतिविधियों को करने, परियोजनाओं का मूल्‍यांकन करने और मंज़ूरी दिलवाने के लिए एक नया राष्‍ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास प्राधिकरणबनाया जा रहा है।
  • 5 smart शहरों गुजरात में धोलेरा;महाराष्‍ट्र में शेंद्रा-बिडकिन;ग्रेटर नोएडा (यूपी) में एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप;उज्‍जैन (मध्य प्रदेश) के पास एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप;गुड़गाव, हरियाणा, में Global City के कार्य दिल्‍ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा (डीएमआईसी) में तेज़ गति से चल रहे हैं।
  • चैन्‍नई-बैंगलुरू औद्योगिक गलियारा परिप्रेक्ष्‍य योजना पूरी हो गयी है। ADB प्रस्‍तावित पूर्वी तट आर्थिक गलियारा के विजाग-चैन्‍नई चरण की परिप्रेक्ष्‍य योजना पर कार्य कर रहा है।
  • अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारा से संबंधित कार्य को तेज़ करने के क़दम उठाए जा रहे हैं। व्‍यवहार्यता अध्‍ययन को record समय में पूरा करने की संभावना है।
  • भारत में औद्योगिक पार्कों के विकास सहित चीनी और भारतीय उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए भारत और चीन के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर हुए हैं, ताकि दोनों देशों के उद्योगों को समूह रूप में विकास के लिए एक प्‍लेटफॉर्म मिल सकें। कार्य को आगे बढ़ाने के लिए एक कार्य दल बनाया गया है।
  • निवेश और विनिर्माण समूह के विकास की पहल को जारी रखते हुए, ओड़िसा में कालिंगानगर, जाजपुर जिले में एक अतिरिक्‍त राष्‍ट्रीय निवेश और विनिर्माण क्षेत्र (National Investment and Manufacturing Zones — NIMZ) का सिद्धांतत: अनुमोदन कर दिया गया है, इस प्रकार सिद्धांतत: अनुमोदन के NIMZ की संख्‍या 17 हो गयी है।
  • इसके अलावा, संशोधित औद्योगिक अवसंरचना उन्‍नयन योजना के तहत 21 औद्योगिक परियोजनाओं को सिद्धांततः अनुमोदित कर दिया गया है।

राष्‍ट्रीय डिज़ाइन संस्‍थान (NID) अहमदाबाद को राष्‍ट्रीय महत्‍व का संस्‍थान बनाने के लिए मान्‍यता देने वाले एक अधिनियम पर 17 जुलाई 2014 को राष्‍ट्रपति का अनुमोदन प्राप्‍त हुआ। इससे NID अहमदाबाद डिज़ाइन शिक्षा में शीर्ष निकाय के रूप में डिग्रियाँ देने, अनुसंधान को प्रोत्‍साहन देने और कार्य करने में सक्षम होगा। चार नए राष्‍ट्रीय डिजाइन संस्‍थान स्‍थापित किए जा रहे हैं।

सरकार श्रम सघन (labout intensive) विनिर्माण पर ध्‍यान दे रही है। विगत 100 दिनों के दौरान भारतीय चमड़ा विकास कार्यक्रम ने 51, 216 बेरोज़गार युवकों को प्रशिक्षण दिया है और इन प्रशिक्षित युवकों में से 83% को चमड़ा उद्योग में रोज़गार दे दिया गया है। कौशल विकास पर ज़ोर देने के लिए footwear design और विकास संस्‍थान के दो नए केंद्रों की स्‍थापना की जा रही है।

अनुबंध

भारत में व्‍यवसाय करने की आसानीमें सुधार के संबंध में डीआईपीपी की मुख्‍य पहलें

व्‍यवसाय करने को आसान बनाने के लिए औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग ने कई उपाय किए हैं। ये उपाय निम्‍नलिखित हैं —

  1. स्‍वीकृति (clearance) देने और अनुपालन सुनिश्‍चित करने के लिए राज्‍यों द्वारा अपनाई गई नीतियों का तुलनात्‍मक अध्‍ययन एक्‍सेंचर सर्विसेज (प्राइवेट) लिमिटेड के माध्‍यम से करवाया गया। इस अध्‍ययन के परिणामस्‍वरूप 6 सर्वोत्‍तम नीतियों की पहचान की गई। इन नीतियों का मूल्‍यांकन करने के लिए राज्‍यों को भेजा गया।
  2. देश में व्‍यवसाय नियामक वातावरण में सुधार करने के लिए इन पहलों को आगे ले जाने में Department of Industrial Policy and Promotion (DIPP) की मदद करने हेतु राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार), वाणिज्‍य एवं उद्योग ने सभी राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों और सभी संघ शासित क्षेत्रों के प्रशासकों को एक पत्र लिखा है।
  3. औद्योगिक लाइसेंस (Industrial Licence — IL) और औद्योगिक उद्यमी ज्ञापन (Industrial Entrepreneurs Memorandum — IIM) के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है और अब यह सेवा बिना किसी मानवीय संपर्क के eBiz वेबसाइट पर 24x7 आधार पर उद्यमियों के लिए उपलब्‍ध है। इससे आवेदन पत्र भरना और सेवा प्रभारों का ऑनलाइन भुगतान करना आसान हो जाएगा तथा यह सुनिश्चित हो जाएगा कि आवेदन करने या भुगतान करने के लिए किसी उद्यमी को मंत्रालय नहीं आना पड़ेगा।
  4. प्रेस नोट 3 (2014) के ज़रिए, औद्योगिक लाइसेंसिंग के लिए रक्षा उत्‍पादों की सूची जारी की गई है, जिसमें बड़ी संख्‍या में पुर्जों/संघटकों, कास्टिंग/फॉर्जिंग आदि को औद्योगिक लाइसेंस के क्षेत्र से हटा दिया गया है। इसी प्रकार सैन्‍य तथा असैन्‍य अनुप्रयोगों (जब तक कि रक्षा मदों के रूप में वर्गीकृत न हो) वाली दोहरे उपयोग की मदों के लिए भी रक्षा की दृष्टि से औद्योगिक लाइसेंस अपेक्षित नहीं होगा। इससे घरेलू और अंतर्राष्‍ट्रीय कंपनियां लंबी प्रक्रियाओं से गुजरे बिना विनिर्माण करने में सक्षम होंगी। आवेदक को इन मदों के लिए अब केवल औद्योगिक उद्यमी ज्ञापन (आईईएम) दायर करना जरूरी होगा।
  5. प्रेस नोट 5(2014) के जरिए, औद्योगिक अनुज्ञापत्र (licence) की प्रारंभिक वैधता अवधि को 2 वर्ष से बढ़ा कर 3 वर्ष कर दिया गया है। इससे लाइसेंस प्राप्‍तकर्ताओं को स्‍थानीय प्राधिकरणों से आवश्‍यक मंज़ूरियाँ/अनुमोदन प्राप्‍त करके, सुरक्षा संबंधी पहलुओं को लागू करके, मशीनरी श्रम शक्ति, प्रौद्योगिकी का कार्यान्‍वयन आदि करके औद्योगिक अनुज्ञापत्र कार्यान्वित करने के लिए अधिक समय मिल जाएगा।
  6. औद्योगिक लाइसेंस की वैधता बढ़ाने के लिए आवेदनों पर कार्यवाही को सरल बनाने के लिए प्रेस नोट 5 (2014) के ज़रिए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। इससे विस्‍तार प्रदान करना बहुत ही सरल हो गया है।
  7. औद्योगिक लाइसेंस आवेदनों पर सुरक्षा संबंधी मंज़ूरी प्रदान करने के लिए गृह मंत्रालय द्वारा अधिकतम 12 हफ़्तों की समय-सीमा तय की गई है।
  8. उत्‍पादन की आंशिक शुरूआत को अनुज्ञापत्र में शामिल सभी मदों के उत्‍पादन की शुरूआत माना जाएगा। इससे उद्यमी को औद्योगिक अनुज्ञापत्र की वैधता बढ़ाने के लिए बार-बार प्रशासनिक मंत्रालयों में जाने की कठिनाई से बचने में मदद मिलेगी।
  9. निवेशकों की सहायता तथा उनके प्रश्‍न का उत्तर देने के लिए औद्योगिक लाइसेंस प्रदान करने हेतु आवेदकों द्वारा बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्‍नों (frequently asked questions — FAQ) को तैयार किया गया है तथा औद्योगिक नीति एवं सवंर्धन विभाग की वेबसाइट पर upload किया गया है।
  10. प्रेस नोट 4 (2014) के ज़रिए, National Industrial Classification Code (NIC Code) के उन्नतत संस्करण (NIC 2008) को अपनाया गया है जो एक अत्याधुनिक व समसामयिक औद्योगिक श्रेणी है। NIC 2008 NIC 1987 का उन्नत संस्करण है तथा यह भारतीय व्यवसायों को वैश्विक रूप से मान्य तथा स्वीकार्य श्रेणी को अपनाने के योग्य‍ बनाएगा जिससे आसानी से अनुमोदन/पंजीकरण तथा श्रेणीकरण में सहायता मिल जाएगी।
  11. प्रेस नोट 6 (2014) के ज़रिए, ‘अनुज्ञापित रक्षा उद्योगके लिए सुरक्षा संबंधी नियम-पुस्तिकाजारी की गई है। सुरक्षा संबंधी नियम पुस्तिका जारी होने के साथ ही आवेदकों से शपथ-पत्र की आवश्‍यकता समाप्‍त हो गई है। इससे पहले, आवेदक द्वारा न्‍यायिक मजिस्‍ट्रेट से यह पुष्टि करने के लिए शपथ-पत्र अपेक्षित था कि वे कंपनी और इनकी आपूर्ति श्रृंखला के लिए रक्षा उत्‍पादन विभाग, रक्षा मंत्रालय तथा गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा बनाए जाने वाले संरक्षा और सुरक्षा दिशानिर्देशों/प्रक्रिया सिफारिशों को स्‍वीकार करेंगे तथा उनका पालन करेंगे। आवेदकों को ऐसे शपथ-पत्र प्राप्‍त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था तथा इसके कारण अनुज्ञापन समिति का अनुमोदन मिलने के बाद भी लाइसेंस जारी करने में काफी विलंब हो रहा था।
  12. खुदरा/NRI/EOU विदेशी निवेश से संबंधित मामलों में विदेशी निवेशकों द्वारा दायर सभी आवेदनों पर कार्यवाही के लिए विशिष्‍ट समय-सीमाओं वाली जाँच-सूची विकसित की गई है। यह औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग की website पर डाली गई है।
  13. कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (Employees’ Provident Find Organisation — EPFO) और कर्मचारी राज्‍य बीमा निगम (Employees’ State Insurance Corporation — ESIC) में पंजीकरण के मामले को श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय, महानिदेशक, ESIC तथा केंद्रीय भविष्‍य निधि आयुक्‍त के समक्ष उठाया गया है। इसके परिणामस्‍वरूप प्रक्रियाएं online पंजीकरण के ज़रिये स्‍वशासित हुई हैं तथा ESIC पंजीकरण संख्‍या वास्‍तविक समय आधार पर उपलब्‍ध कराई जा रही है।
  14. विनियामक वातावरण को सरल व युक्तिसंगत बनाने के लिए भारत सरकार के सभी सचिवों और राज्‍यों/संघ शासित क्षेत्रों के मुख्‍य सचिवों को परामर्शिका (advisory) भेजी गई है। विनियामक व्यावसायिक वातावरण में सुधार के लिए सभी विभागों/राज्‍य सरकारों से प्राथमिकता के आधार पर निम्‍नलिखित उपाय अपनाने का अनुरोध किया गया है —

     सभी विवरणियाँ एकीकृत फ़ॉर्म के ज़रिए online दायर की जानी चाहिए;

     अपेक्षित अनुपालन की जाँच-सूची मंत्रालय/विभाग की website पर डाली जानी चाहिए;

      व्‍यवसाय द्वारा रखे जाने के लिए अपेक्षित सभी register एकल electronic register से प्रतिस्‍थापित किए जाने चाहिए;

     विभाग के प्रमुख के अनुमोदन के बिना कोई भी निरीक्षण नहीं किया जाना चाहिए और

      सभी जोख़िम-रहित, ग़ैर-ख़तरनाक व्‍यवसायों के लिए एक स्‍व-प्रमाणन प्रणाली शुरू की जानी चाहिए।

  1. औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग eBiz परियोजना कार्यान्वित कर रहा है जो मंज़ूरियाँ प्रदान करने और स्‍वीकृति दायर करने के लिए निवेशक केंद्रित केंद्र-और-सहायता आधारित online एकल खिड़की model का निर्माण करेगी। यह परियोजना व्‍यवसाय और निवेश संबंधी सेवाएं प्राप्‍त करने के लिए एक एकल मंच उपलब्ध कराएगी।यह एक संयुक्‍त फ़ॉर्म के ज़रिए कई सेवाएँ और एकल भुगतान तंत्र उपलब्‍ध कराएगी जिसके ज़रिए चालान और Management Information System (MIS) reports सृजित करने के साथ ही इन्‍हें केंद्र/राज्‍य/para-state agencies के संबंधित खाता शीर्षों को बांटा व भेजा जा सकता है। इस परियोजना के परिणामस्‍वरूप मंज़ूरियाँ प्राप्‍त करने और अनुपालन सुनिश्चित करने में लगने वाले समय, प्रयासों और लागतों में कमी आने से व्‍यवसाय करने में आसानी के वातावरण में काफ़ी सुधार होगा। केंद्र सरकारी सेवाओं के साथ एकीकरण का कार्य सर्वोच्‍च प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है।

व्‍यवसाय करने में आसानी सुनिश्चित करने वाले कारकों की समीक्षा करने के लिए तथा इनमें सुधार के लिए कार्यवाही बिंदुओं की पहचान हेतु राज्‍य सरकारों के साथ बैठकें आयोजित की जा रही हैं।


 

Development of a robust manufacturing sector is the priority of the Government. It has the potential to not only take theeconomic growth to a higher trajectory, but also to provide employment.  The Government is committed to remove all bottlenecks and develop India as a manufacturing hub. A number of measures have been taken by the Government in that direction.

Sithamaran gesture PTI 360 8During the last three months, the economic activity has picked up as reflected in the quarterly growth figures of GDP which grew at 5.7 % in the first quarter (Q1) of April-June 2014over the corresponding period ofthe previous year (based on CSO estimates).Industrial growth in general and growth in the manufacturing sector in particular has shown significant improvement with growth rates becoming positive as compared to negative growth rates in these sectors in the corresponding period of 2013-14. Gross Fixed Capital Formation (GFCF), the indicator of investment grew as much as by 7% in Q1 of 2014-15, while last year in Q1 the growth rate of GFCF was negative, whichreflects upbeat mood of investors and augurs well for the future growth prospects. This perceptible improvement is a reflection of the improved business environment and market sentiment. The HSBC PMI report of July and August 2014 and the Business Confidence Index recently brought out by NCAER validate the positive business sentiment.

This perceptible improvement in the economic performance in last three months is a reflection of the improved business environment and market sentiment, an outcome of the series of initiatives taken by the Government to bring about positive changes to revitalise the industrial sector in general and manufacturing sector in particular.A number of positive announcements have already been made in the Union Budget 2014-15 in that direction.

Providingan enabling and conducive environment for doing business in India isan important factor contributing to industrial growth. The emphasis of the Government has beenonsimplification of the procedures, rationalization of the existing rules and increased use of information technology to make governance more efficient, effective, simple and user-friendly.  The initiativestaken for ease of doing business in India are given in the Annexure.

Editor Surajit Dasgupta’s remarks
The Congress allegation that the NDA Government is only furthering UPA Government’s projects is part truth, part myth.

All the foundation stones Prime Minister Narendra Modi has been laying and all the projects he is ‘dedicating to the nation’ these days are indeed a culmination of work begun by the Manmohan Singh Government. Second, why is the prime minister on a red ribbon cutting spree only in the 4 States that happen to be poll-bound? Are the 25 other States lesser parts of India where development can wait?

But Modi deserves credit for fast-tracking these roads, rail tracks, ports etc. Instead of crying foul about the inauguration ceremonies, the Congress must curse its policy-paralysed governance that watched helplessly as one project after another got stuck in administrative bottlenecks. To revive its falling fortunes towards the end of UPA II, more than half of all that Modi has inaugurated in the last three months could have been started in the previous fiscal year.

Foreign Direct Investment (FDI) being an important resource, the Government has taken a number of steps to attract more FDI inflows into the country. The FDI policy in Defence sector has been liberalised and FDI cap has been raised from 26% to 49% [vide press note 7(2014 series)]; 100% FDI under automatic route has been permitted in construction, operation and maintenance in specified Rail Infrastructure projects[vide press note 8 (2014 series)]; the norms for FDI in the Construction Development sector are being eased. FDI inflows have increased by 75% during June and July, 2014 over thecorresponding period in previous year.

The development of industrial corridors and industrial clusters has been fast paced with a series of initiatives:

  • A new ‘National Industrial Corridor Development Authority’ is being created to  carry out project development activities, apprise and sanction projects, implement and coordinate all central efforts for industrial corridor development of all Industrial Corridors.
  • Work on 5 smart cities namely, Dholera in Gujarat;Shendra-Bidkin in Maharashtra; Integrated Industrial Township in Greater Noida (UP); Integrated Industrial Township  near Ujjain (MP); Global City in Gurgaon, Haryana is  moving at a fast pace  in Delhi-Mumbai Industrial Corridor (DMIC).
  • The Perspective Plan for Chennai-Bengaluru Industrial Corridor has been completed. ADB is working on Perspective Plan for the Vizag-Chennai phase of the proposed East Coast Economic Corridor.
  • Steps are being taken to expedite the work relating to the Amritsar-Kolkata Industrial Corridor. The Feasibility Study is likely to be completed in record time.
  • A Memorandum of Understanding (MoU) between China and India has been signed for promoting cooperation between Chinese and Indian enterprises including the development of industrial parks in India, so as to provide a platform for cluster type development of the enterprises of both countries. A Working Group has been set up to take the workforward.
  • In continuing the initiative of developing Investment and manufacturing clusters, one additional National Investment and Manufacturing Zone (NIMZ) at Kalinganagar, Jajpur district in Odisha has been given in-principle approval, bringing the number of NIMZ’s which have been given in-principle approval to 17.
  • Besides, under the Modified Industrial Infrastructure Up-gradation (sic) Scheme, in-principle approval has been accorded to 21 Industrial projects.

AnAct recognizing National Institute of Design (NID) Ahmedabad as an institute of National Importance received assent of the President on 17 July 2014. This will enable NID Ahmedabad to confer degrees, promote research and function as an Apex body in Design Education. Four new National Institutes of Design are being established.

The Government is focusing on building labour intensive manufacturing. The Indian Leather Development Programme during the last 100 days has provided training to 51216 unemployed youths and 83% of these trained youths have been employed in the leather industry. To provide further impetus to skill development two new Centres of Footwear Design & Development Institutes are being set up.

Annexure

Major Initiatives by DIPP on Improving ‘Ease of Doing Business’ in India

The Department of Industrial Policy and Promotion (DIPP) has taken a series of measures to improve Ease of Doing Business. The measures taken are:

1.         A comparative study of practices followed by the States for grant of clearance and ensuring compliances was conducted through M/s Accenture Services (P) Ltd. As a result of this study, six best practices were identified. These best practices were circulated among all the States for peer evaluation.

2.         A letter has been written by Minister of State (Independent Charge), Commerce and Industries to Chief Ministers of all the States and Administrators of all the UTs to partner with DIPP in taking these initiatives forward to ease the business regulatory environment in the country.

3.         Process of applying for Industrial License (IL) and Industrial Entrepreneur Memorandum (IEM) has been made online and this service is now available to entrepreneurs on 24×7 basis at the eBiz website, without human interface. This will lead to ease of filing applications and online payment of service charges and ensure that no entrepreneur has to come to the Ministry to file his/her application or make payment.

4.         Vide Press Note 3 (2014), Defence products’ list for industrial licensing has been issued, wherein large number of parts/components, castings/forgings etc. have been excluded from the purview of industrial licensing. Similarly dual use items, having military as well as civilian applications (unless classified as defence item) will also not require Industrial License from defence angle. This will enable domestic and international companies to undertake manufacturing without going through a lengthy process. The applicant now only needs to file an Industrial Entrepreneur Memorandum (IEM) for these items.

5.         Vide Press Note 5 (2014), initial validity period of Industrial License has been increased to three years from two years. This will enable the licensees more time for implementation of the Industrial License by way of obtaining the necessary clearances/approvals from local authorities, putting in place the security aspects, machinery manpower, implementation of technology, etc.

6.         Guidelines have been issued, vide Press Note 5 (2014), to streamline the processing of applications for grant of extension of validity of Industrial License. This has made the grant of extension extremely simple.

7.         A maximum timeline of 12 weeks has been finalised by MHA for grant of security clearance on Industrial Licence Applications.

8.         Partial commencement of production will be treated as commencement of production of all the items included in the license. This will facilitate the entrepreneurs from hardship of repeatedly coming to the administrative Ministries for extension of validity of Industrial License.

9.         To facilitate investors and to provide answer to their queries, Frequently Asked Questions (FAQs) by applicants for grant of industrial license have been developed and uploaded on DIPP website.

10.       Vide Press Note 4 2014, the advanced version of NIC Code (NIC 2008) has been adopted, which is a highly contemporary industrial classification. NIC 2008 is an improved version of NIC 1987 and will allow Indian businesses to undertake globally recognized and accepted classification that facilitate smooth approvals/registration and categorization.

11.       Vide Press Note 6 (2014), the ‘Security Manual for Licensed Defence Industry’ has been issued. With the issue of the Security Manual, the requirement of affidavit from the applicants, has been done away with. Earlier, an affidavit from a Judicial Magistrate was required from the applicant to confirm that they will abide and comply with the safety & Security guidelines/procedures recommendation for the firm & its supply chain and as and when laid down by the Department of Defence Production, M/o Defence, Ministry of Home Affairs in Government of India. The applicants were facing difficulties in obtaining such affidavit and this was severely delaying the issue of License even after approval of Licensing Committee.

12.       A checklist with specific time-lines has been developed for processing all applications filed by foreign investors in cases relating to Retail/NRI/EoU foreign investments. This has been placed on the DIPP website.

13.       The issue of time taken in registration with Employees Provident Fund Organization (EPFO) and Employees State Insurance Corporation (ESIC) was taken up with the Ministry of Labour and Employment, Director General, ESIC and Central Provident Fund Commissioner. This has led to both processes being automated through on-line registration and ESIC registration number being provided on a real-time basis.

14. An Advisory has been sent to all Secretaries of Government of India and Chief Secretaries of the States/UT to simplify and rationalize the regulatory environment. In order to improve the regulatory business environment all departments/State Governments have been requested to take the following measures on priority:

a. All returns should be filed on-line through a unified form;

b. A check-list of required compliances should be placed on Ministry’s/Department’s web portal;

c. All registers required to be maintained by the business should be replaced with a single electronic register;

d. No inspection should be undertaken without the approval of the Head of the Department; and

e. For all non-risk, non-hazardous businesses a system of self-certification should be introduced.

15. The Department of Industrial Policy and Promotion is implementing the eBiz project which will create an investor centric hub-and-spoke based online single window model for providing clearances and filing compliances. This project will provide a single platform to avail business and investment related services. It will provide a bouquet of services through a single composite form and a single payment mechanism which can be apportioned, split and routed to the respective heads of account of Central / State / Parastatal agencies along with generation of challans and MIS reports. This project will result in radical improvements in ease of doing business by reducing time, efforts and costs taken in obtaining clearances and ensuring compliances. Integration with Central Government services is being done on highest priority.

16.       Meetings are being organised with State Governments for undertaking review of the factors affecting Ease of Doing Business and identifying action points for its improvement.

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Andhra Cabinet okays Disha Bill that dictates judiciary

While ordering the prosecution to complete its work in 14 days is permissible, Andhra Pradesh cannot set a time limit for the judiciary

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