Friday 27 May 2022
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आम आदमी पार्टी पर पूर्व मध्य प्रदेश प्रवक्ता ने एक और बम फोड़ा

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आदमी पार्टी के बेबाक पूर्व प्रवक्ता प्रह्लाद पाण्डेय ने फ़ेसबुक पर अपनी पार्टी के नेतृत्व की कार्यशैली की कड़ी आलोचना की है। इससे पहले पिछले साल के अंत तक वो नाराज़ कार्यकर्ताओं से गुज़ारिश किया करते थे कि वे खुले-आम पार्टी के ख़िलाफ़ बग़ावत न करें और दिल्ली विधान सभा चुनाव के बाद ही अपनी शिकायतें दर्ज करवाएँ। जब पार्टी में स्थिति नहीं सुधरी तब उन्होंने फ़ेसबुक पर और ई-मेल के द्वारा यह जग-ज़ाहिर किया कि योगेन्द्र यादव सरीखे ऊपर से टपके नेता वोटिंग के नाम पर पार्टी के अन्दर किस प्रकार की धांधली करते हैं। अब उनके आज का खुला पत्र —

“आम आदमी पार्टी लगातार पतन की तरफ़ जा रही है, इसलिए पार्टी को बचाने के लिए कुछ सुझाव दे रहा हूँ। ये सुझाव उन निःस्वार्थ कार्यकर्ताओं को दे रहा हूँ जिन्होंने अपने पसीने से पार्टी को खड़ा किया है

  1. अभी तक जिन लोगों ने पार्टी छोड़ी है उन्हें ससम्मान पार्टी में वापस बुलाया जाए। अभी तक जिन लोगों ने पार्टी छोड़ी है उनके पार्टी छोड़ने के संभावित कारण हैं — पार्टी का अपनी नीतियों और सिद्धांतों से हट जाना, कुछ नेताओं का पार्टी में अधिनायक की तरह व्यवहार, पार्टी में उनकी उपेक्षा, पार्टी द्वारा उन्हें टिकेट न दिया जाना आदि। मैं चाहता हूँ कि विनोद कुमार बिन्नी को भी पार्टी में वापस लिया जाये क्योंकि बिन्नी ने जो सवाल उठाये थे ठीक वही सवाल शाज़िया इल्मी ने भी उठाये हैं। वही प्रश्न मैंने भी उठाए। वही प्रश्न सुरजीत दासगुप्ता, अश्विनी उपाध्याय ने भी उठाये। लगभग सभी कार्यकर्ताओं के मन में यह सवाल है कि पार्टी में पारदर्शिता और आंतरिक लोकतंत्र की कमी हैक्या हम कांग्रेस की तरह एक ऐसी पार्टी बनाना चाहते हैं जिसमें अपने नेता की सच्ची आलोचना करने पर पार्टी से निष्कासित कर दिया जाए? क्या हम ऐसी पार्टी बनना चाहते हैं जो दूसरी पार्टी के अच्छे कार्यों की भी निंदा करे? हम ऐसी पार्टी बनाना चाहते हैं जिसका ह्रदय इतना विशाल हो कि वह स्वयं की आलोचना सुन सके, आलोचना सुनकर उस पर विचार करे, और यदि सुधार की गुंजाइश हो तो सुधार करे। विद्वान कहते हैं “निंदक नियरे राखिये आँगन कुटी छबाय” और हम हैं कि उनको भगाने में लगे हैं! विनोद कुमार बिन्नी, मधु भंडारी, अश्विनी उपाध्याय, सुरजीत दासगुप्ता, शाज़िया इल्मी, कैप्टन गोपीनाथ, कमल श्रीवास्तव आदि सभी साथियों को वापस लाया जाए।
  2. आम आदमी पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए सबसे पहले राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों का चुनाव होना चाहिए। वर्तमान में ज़िला और प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्यों का चयन आंतरिक लोकतंत्र के द्वारा हुआ है। यह गंभीर बात है कि आंतरिक लोकतंत्र की बात करने वाली आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य मनोनीत हैं। ये सदस्य चयनित होने चाहिएं। आंतरिक लोकतंत्र द्वारा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों के चयन के पश्चात प्रदेश कार्यकारणी के सदस्यों का भी पुनः चुनाव होना चाहिए। ये चुनाव पूरी तरह व्यवस्थित और पारदर्शी होने चाहिएं। राज्य स्तर पर पार्टी के गठन के पश्चात ज़िला कार्यकारिणी के चुनाव पर ध्यान देना चाहिए।
  3. बिना नीतियों और सिद्धांतों का संगठन ज़्यादा दिनों तक जीवित नहीं रहता। एक राजनैतिक पार्टी की राय बिलकुल स्पष्ट होना चाहिए। आम आदमी पार्टी की आर्थिक नीति उदारवादी नीति होगी या वामपंथी होगी यह बिलकुल साफ़ होना चाहिए। विदेश नीति, धारा 370, आरक्षण, समान नागरिक संहिता आदि सभी मुद्दों पर हमारी राय साफ़ हो। और ये नीतियां और राय दिल्ली में बैठे नेता न तय करें। पार्टी के सभी कार्यकर्ता अपनी-अपनी राय व्यक्त करें। पार्टी के अन्दर विचार-विमर्श हो। तब जाकर हमारी पार्टी की राय बने। दिल्ली में बैठने वाले 10-15 लोगों को पार्टी का भविष्य तय करने का अधिकार नहीं दिया जा सकतापार्टी के अन्दर विचारवान युवाओं की कमी नहीं है। अन्य पार्टियों की तरह यदि अपनी पार्टी में भी युवाओं को सिर्फ झंडा, बैनर लगाने के काम में लगा दिया जाएगा तो क़ाबिल युवा कभी राजनीति में नहीं आयेंगे।
  4. 10416963 10152481297169680 1256191647 nपार्टी ने मनमाने तरीक़े से टिकट बांटे हैं। पार्टी की यह बहुत बुरी हार है। हम आज़ादी की दूसरी लड़ाई लड़ रहे थे। आपातकाल के बाद पहली बार ऐसा माहौल बना थापूरे देश के ज़्यादातर लोग राजनीति में रुची लेने लगे थे। हमने इस स्वर्णिम अवसर को गवां दिया। पार्टी के जो लोग ४ सीटें पाकर ख़ुश हैं उन्हें सोचना चाहिए कि देश के कितने लोगों ने पार्टी को खड़ा करने के लिए अपना नौकरीव्यवसाय छोड़ा। कितना नुक़सान हुआ। कितने युवाओं ने अपनी पढाई के साथ समझौता किया। दुख हार का नहीं है। दुख इस बात का है कि हमारे पास न हमारे सिद्धांत रहे और न जीत ही मिली। हम बड़ी-बड़ी बातें करते थे — जनता उम्मीदवार तय करेगी, कार्यकर्ता उम्मीदवार तय करेंगे आदि। किसने उम्मीदवार तय किये? या तो हम बड़ी-बड़ी बातें न करें। या फिर प्राण देकर भी उन बातों को निभाएँ।
  5. आम आदमी पार्टी व्यक्ति-आधारित पार्टी बनकर रह गई है। यदि एक व्यक्ति के अच्छे कार्यों से पार्टी को फ़ायदा होता है तो उसी व्यक्ति के ग़लत निर्णयों से नुक़सान भी होता है। केजरीवाल जी की छवि के कारण पार्टी स्थापित हुई तो दुर्भाग्य से आज उन्ही के निर्णयों के कारण पार्टी की छवि लगातार ख़राब हो रही है। इसमें मैं उनका दोष नहीं देखता। हर व्यक्ति से अच्छे-बुरे निर्णय होते हैं, ग़लतियाँ होती हैं। लेकिन किसी एक व्यक्ति के भरोसे पार्टी नहीं होना चाहिए। पार्टी अपने विचारों और सिद्धांतों को अपना नेता बनाये। शेष सभी कार्यकर्ता हैं। सिद्धांत, लक्ष्य, उद्देश्य महत्त्वपूर्ण हों। पार्टी के नेता उन उद्देश्यों की प्राप्ति का साधन हो। हम एक ऐसी पार्टी बनाना चाहते हैं जिसमें कोई व्यक्ति रहे न रहे लेकिन पार्टी के लक्ष्य और सिद्धांत सदा पार्टी का, पार्टी की आगामी पीढ़ी का नेतृत्व करते रहें।
  6. yyअभी हमारी पार्टी को अपने आपको ठीक करना ज़रूरी हैं। हम कहते हैं कि हम देश में एक ऐसा लोकतंत्र स्थापित करना चाहते हैं जिसमें देश के सभी लोगों को पहल और जनमत (Initiative and Referendum) के माध्यम से क़ानून बनाने में हिस्सेदार बनाया जा सके। पार्टी ने 31 जनवरी को अपने संविधान में संशोधन किया। राष्ट्रीय कार्यकारिणी के10-15 लोगों ने मिलकर संविधान संशोधन कर लिए! जब हम अपनी पार्टी के सदस्यों की बात नहीं सुन रहे हैं तो आम जनता की बात कैसे सुनेंगे? जो सिद्धांत हम अपनी पार्टी के अन्दर लागू नहीं कर पा रहे हैं हम उन्हें देश में कैसे लागू करेंगे?
  7. पिछले 5-6 महीनों में हमारा ध्यान सिर्फ़ चुनाव की तरफ़ था। लेकिन याद कीजिये हमारे लक्ष्य क्या थे? जन लोकपाल, स्वराज क़ानून, राइट तो रिजेक्ट, राइट तो रिकॉल, प्रशासनिक व न्यायिक सुधार, चुनाव सुधार, पारदर्शिता… क्या हम अपने उद्देश्य भूल नहीं रहे हैं? दुर्भाग्य से हमारे लक्ष्य पीछे रह गए, नेता आगे चले गए। इसे बदलना होगा।
  8. राष्ट्रीय परिषद् की शक्ति को कमजोर कर दिया गया है। इसे पुनर्स्थापित करने की ज़रूरत हैं। राष्ट्रीय परिषद् की बैठक जल्द बुलाई जानी चाहिए।

मैंआप सब साथियों का आह्वान करता हूँ कि अपनी पार्टी को पुनर्स्थापित करने के लिए सुझाव दें। सार्वजनिक रूप से दें तो बेहतर होगा ताकि सभी लोग उससे अपनी सहमति-असहमति व्यक्त कर सकेंगे।

यदि आपको मेरे विचार ठीक लगे हों तो इन्हें अन्य लोगों तक पहुँचाएँ। यदि मेरे विचार अनुचित हों तो मुझे बताएँ ताकि मैं उन पर पुनर्विचार कर सकूँ।”

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Surajit Dasgupta
Surajit Dasgupta
Co-founder and Editor-in-Chief of Sirf News Surajit Dasgupta has been a science correspondent in The Statesman, senior editor in The Pioneer, special correspondent in Money Life, the first national affairs editor of Swarajya, executive editor of Hindusthan Samachar and desk head of MyNation

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