Saturday 28 May 2022
- Advertisement -

अरविन्द, मनीष, योगेन्द्र और मेधा अपने पासपोर्ट्स दिखाएँ: अश्विनी

अश्विनी उपाध्याय वो शख़्स हैं जो कभी आम आदमी पार्टी के क़ानूनी विभाग के प्रमुख थे। इन्होंने पार्टी में चल रही देश-विरोधी गतिविधियों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई जिस की वजह से उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। ये सर्वोच्च न्यायलय (Supreme Court) में वकालत करते हैं और अरविन्द केजरीवाल एवं मनीष सिसोदिया से इनकी पहचान कई वर्ष पुरानी है — जन लोकपाल आन्दोलन से पुरानी। उपाध्याय केजरीवाल और सिसोदिया को उस समय से जानते हैं जब आज के आम आदमी पार्टी के नेता परिवर्तन और कबीर नाम के ग़ैर-सरकारी संस्थाएँ (NGOs/एन जी ओज़) चलाते थे। इसलिए उनके इल्ज़ामात में अन्दर की ख़बर होगी यह मान लेना अनुचित नहीं है।

पार्टी से निष्कासित होने के बाद उपाध्याय ने व्यवस्था परिवर्तन की मुहीम शुरू की। उनके नेतृत्व में “श्रेष्ठ भारत” आदोलन 9 अगस्त को शुरू होने वाला है। 16 जून की शाम जब वे बैंगलोर से दिल्ली ट्रेन से वापस आ रहे थे तब सिर्फ़ News के मुख्य सम्पादक सुरजीत दासगुप्ता ने उनसे फ़ोन पर बातचीत की।

 

आपके साथ कौन-कौन हैं? कुछ नामचीन लोगों के नाम गिनवाइए जो आपके साथ मंच साझा करेंगे जब आप आन्दोलन शुरू करेंगे।
JS Rajputअभी विचार-विमर्श का दौर चल रहा है। दिल्ली में एन सी ई आर टी के डायरेक्टर जगमोहन एस राजपूत के साथ मिलकर हमने इसकी अवधारणा पर विचार-विमर्श किये। वो हमारे साथ हैं। फिर हमने उत्तर प्रदेश के पूर्व डी जी पी प्रकाश सिंह से बात की। वो भी हमारे साथ हैं। वो पुलिस सुधार पर काम करेंगे। पंजाब के डी जी पी शशि कान्त, जो अभी आम आदमी पार्टी में हैं — उन्होंने पार्टी छोड़ी नहीं है लेकिन वो पार्टी छोड़कर हमारे साथ आ जायेंगे — वो भी पुलिस रिफार्म (शराब एवं नशीली पदार्थों पर नीति निर्धारण) पर काम करेंगे। मुंबई के डिप्टी कमिश्नर वाय पी सिंह हमारे साथ नज़र आएंगे। जस्टिस डी एस तेवतिया न्यायपालिका में सुधार पर काम करेंगे।

हमने पाँच एजेंडा रखा है — शिक्षा, स्वास्थ्य, चुनाव, कृषि और न्याय।

 

क्या आप एक प्रेशर ग्रुप बने रहेंगे या आगे चलकर आप भी पार्टी बनायेंगे?
नहीं, हम प्रेशर ग्रुप की तरह ही काम करेंगे। हम पार्टी बना कर देख चुके हैं। और पार्टी से हमारा पेट भर चुका है। पार्टी का हमारा कोई इरादा नहीं है।

 

आपको कितना यक़ीन है कि आपका आन्दोलन भीड़ इकट्ठी करने में सफल होगा?
हमें सड़क पर जाने की ज़रूरत नहीं है। हम अपने (श्रेष्ठ भारत) अभियान को 9 अगस्त को लांच करेंगे।

भीड़ की ज़रूरत पड़ेगी या नहीं पड़ेगी इस पर इस वक़्त हम कुछ कह नहीं सकते। ये जो पाँचों रिफ़ॉर्म्स पर हम काम कर रहे हैं इसे हम अक्टूबर के अंत में या नवम्बर की शुरुआत में भारत सरकार को देंगे। अगर सरकार इस पर कार्यवाही करती है तो हमें कुछ करने की ज़रूरत नहीं है। अभी हम राज्य के यूनिट तैयार कर रहे हैं और इस बीच हम ज़िला स्तर पर भी यूनिट बना लेंगे। तब तक जनता के बीच जागरुकता बढ़ाने के लिए हम पम्फ्लेट्स, सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यमों का सहारा लेंगे।

हम सरकार के विरोध में कोई काम नहीं कर रहे। पर अगर सरकार इस पर काम नहीं करती है तब हम जन आन्दोलन शुरू करेंगे।

 

जन लोकपाल अन्दोलन की सफलता के लिए अरविन्द केजरीवाल ने मीडिया को अपने साथ लिया, मीडिया ने आन्दोलन से जुड़ी ख़बरों को ख़ूब उछाला। पहले कांग्रेस के साथ साँठ-गाँठ हुई फिर भाजपा ने भी उनकी मदद की। ऐसी कोई सेटिंग न तो आपकी मीडिया से हुई है और न ही कोई राजनैतिक दल आपके साथ है। फिर आपका आन्दोलन सफल कैसे होगा?
श्री श्री रविशंकर के साथ अश्विनी उपाध्यायहमें सफलता की आशा इसलिए है क्योंकि भ्रष्टाचार और अपराध केवल जन लोकपाल से ख़त्म नहीं हो सकता। इसके लिए सम्पूर्ण व्यवस्था परिवर्तन चाहिए। सबसे ज़्यादा हमारा फ़ोकस शिक्षा व्यवस्था के सुधार पर है। यह जो लॉर्ड मॅकौले वाली शिक्षा व्यवस्था है उस को ख़त्म करके भारतीय रीति-रिवाज के अनुसार, नैतिकता पर ज़ोर देते हुए… ख़ास कर जो प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था है… शिक्षा अधिकार क़ानून ( to Education) में हम संशोधन लाकर कोशिश करेंगे कि समान शिक्षा अधिकार (Right to Uniform Education) किया जाए।

राम जेठमलानी से हमारी बात हुई है। वो हमारे साथ हैं। आरिफ़ मोहम्मद ख़ान हमारे साथ हैं। श्री श्री रविशंकर का आशीर्वाद हमें प्राप्त है। पिछले हफ़्ते हमने स्वामी रामदेव से भी बात की।

 

वो तो राजनेता नहीं हैं। मैं पॉलिटिशियन्स की बात कर रहा हूँ।
राजनेताओं में से हमने अभी सिर्फ़ दो लोगों से बात की है। बाक़ी हम देखते हैं कि सम-चिंतन वाले (like-minded) कौन-कौन हैं जो पार्टी के ऊपर उठ कर इन मुद्दों पर हमारे साथ आयेंगे। वैसे काफ़ी लोग हैं। दिनेश त्रिवेदी से बात करने के बारे में हम लोग सोच रहे हैं और शांता कुमार के साथ भी बात करने की सोच रहे हैं। कुछ लोग ऐसे हैं जिनसे हम अगले एक हफ़्ते के अन्दर बात करेंगे।

 

केंद्र में अभी-अभी एक नई सरकार बनी है और लगता है लोगों को उससे काफ़ी उम्मीदें हैं। वो सोचते हैं कि नई सरकार के काम को आंकने से पहले उसे थोड़ा वक़्त देना चाहिए। ऐसे में आपका आन्दोलन सफल कैसे हो सकता है? क्योंकि आन्दोलन के सफल होने के लिए जन-आक्रोश आवश्यक है।
हमारा उद्देश्य आन्दोलन को सफल बनाना नहीं है। हमारा उद्देश्य अपने एजेंडा को लागू करवाना है। सरकार अगर इन पाँचों मुद्दों पर समितियों का गठन कर दे तो… मैं कहता हूँ कि जगमोहन राजपूत को सरकार (शिक्षा-सम्बंधित) कमिटी में बिठा दे तो हमारे लिए ख़ुशी की बात होगी। पुलिस सुधार के लिए अगर सरकार प्रकाश सिंह को नियुक्त कर दे तो हमारे लिए ख़ुशी की बात होगी। अगर सरकार इन पाँचों मुद्दों पर कमिटी बना देती है तो हम आराम से अपने घर में बैठ जायेंगे।

 

आप कितने प्रभावशाली व्यक्ति हैं? मैं आपसे यह सवाल इसलिए पूछ रहा हूँ कि आप मुझे यक़ीन दिलाएँ कि किस कारण से सरकार आपके दबाव में आ जायेगी? समाज में या राजनीति में अगर आपका कोई रुतबा है तो सरकार आपके दबाव में आ सकती है। आपको लगता है कि ऐसा होगा?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
मुझे लगता है कि ऐसा होगा क्योंकि नई सरकार की नीयत, ख़ास कर नए प्रधानमन्त्री की नीयत हमें ठीक लगती है। मुझे विश्वास है कि जैसे ही इन बातों पर चर्चा शुरू होगी, उनका ध्यान इस ओर जाएगा। और तब शायद वो ख़ुद ही इन सुधारों के लिए पहल करेंगे। हमें सड़क पर उतरने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी ऐसा हमें भरोसा है। और अगर सरकार कुछ नहीं करती है तो निश्चित रूप से हम उतरेंगे सड़कों पे।

 

क्या आपका आन्दोलन दिल्ली पर केन्द्रित रहेगा? या फिर आप राज्य सरकारों पर भी दबाव डालेंगे?
हमारी पाँचों मांगें केंद्र सरकार से सम्बंधित हैं। लेकिन अभी हमने बैंगलोर में बैठक बुलाई थी। हम तमिल नाडु में वही करने जा रहे हैं। 22 तारीख को हमने राँची, झारखण्ड में बैठक बुलाई है। 29 को अहमदाबाद, गुजरात, में बैठक है। 6 जुलाई को हमने महाराष्ट्र की बैठक बुलाई है मुंबई में। हमने अभी 10 राज्य चुने हैं जहाँ हम काम करेंगे।

 

मैं आपसे अपना एक अनुभव साझा करना चाहता हूँ। जब सी बी आई के पूर्व संयुक्त निदेशक बी आर लाल ज़िंदा थे तब उन्होंने बताया था कि पुलिस रिफ़ॉर्म पर काम करते वक़्त जो मुख्यमंत्री उदारवादी माने जाते थे — जैसे पश्चिम बंगाल के ज्योति बासु, आंध्र प्रदेश के एन टी राम राव आदि — उन्होंने भी पुलिस को अपने क़ब्ज़े से मुक्त करने से इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि अगर पुलिस ही उनके कंट्रोल में न रहे तो सत्ता में आने का फ़ायदा क्या है? तो जब राज्य सरकारों का यह रवैया है और क़ानूनी व्यवस्था राज्य सरकार के तहत है, तब केवल केंद्र से बात कर के आपका काम कैसे बनेगा?
इसका सिस्टम यह होगा कि केंद्र सरकार हर राज्य को चिट्ठियाँ लिखेगी। राज्य सरकारों का जवाब फिर पब्लिक के बीच आ जाएगा। फिर जो राज्य सरकारें केंद्र के साथ इन मामलों में सहयोग नहीं करती हैं, निश्चित रूप से हम उन राज्यों में आन्दोलन शुरू करेंगे।

 

पिछले तीन-चार दिन से एक ख़बर सुर्ख़ियों में रही है कि नई केंद्र सरकार विदेशी पैसों से चलने वाले एन जी ओज़ पर कार्यवाही करने वाली है। इन एन जी ओज़ का कहना है कि यह ग़लत है क्योंकि वो तो लोगों की सेवा कर रहे हैं। इस बारे में आपकी क्या राय है? क्या सभी ऐसे एन जी ओज़ संदेहास्पद कार्यों में लिप्त हैं या कुछ अच्छे काम भी कर रहे हैं?
कुछ एन जी ओज़ अच्छा काम कर रहे हैं लेकिन लोक सभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी के 27 ऐसे प्रत्याशी थे जिनको मैं जानता हूँ कि वो प्रत्यक्ष या परोक्ष विदेशी पैसों से एन जी ओज़ चलाते हैं। और यह बहुत गंभीर मुद्दा है।

अगर एन जी ओज़ अच्छा काम कर रहे हैं तो अपना रिटर्न क्यों नहीं फ़ाइल कर रहे? गृह मंत्रालय की रिपोर्ट कहती है कि पिछले 10 साल में 90 हज़ार करोड़ रुपये इनको मिले जिसका केवल 2% रिटर्न फ़ाइल हुआ। इसका मतलब सिर्फ़ रु 1,800 करोड़ का हिसाब मौजूद है। रु 82,800 करोड़ का कोई हिसाब नहीं।

पिछले चार दिनों से मैं बंगलोर में था इसलिए इस दौरान दिल्ली में क्या हुआ इसकी मुझे ख़ास जानकारी नहीं है; मैं पेपर भी नहीं पढ़ पाया इस बीच। लेकिन हम स्वयं केद्र सरकार के गृह मंत्रालय को इस बारे में एक मेमोरेंडम सौंपने वाले हैं। ईमेल मैंने प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा हुआ है इसकी सी बी आई जाँच के लिए। हम दोबारा गृह मंत्री से समय मांगेगे। इसपर अगर कोई कार्यवाही नहीं होती है तो जुलाई में इसपर हमने एक पी आइ एल डालने की बात सोची है। मैं और एम एल शर्मा मिलकर सुप्रीम कोर्ट में पी आइ एल करेंगे।

जितने विदेशी पैसों से चलने वाले एन जी ओज़ हैं उनमें से केवल 2% अपना कर भरते हैं और इनकी एक्टिविटीज काफी संदिग्ध हैं। इसकी जाँच होनी चाहिए। पहली बात तो यह कि अगर वो रिटर्न नहीं भरते तो इनकम टैक्स के जो भी नियम हैं उनके तहत उनपर कार्यवाही होनी चाहिए। इसके अलावा उनकी गतिविधियों पर भी निगरानी रखी जाए और उस पर कार्यवाही की जाए। इन सभी मुद्दों पर हम गृह मंत्री से मिलेंगे।

 

पर उनको इस बात से इनकार नहीं है कि वो विदेश से पैसे लेते हैं। वो अपने बचाव में कहते हैं कि उन पैसों से वो जनता की भलाई के लिए ही काम करते हैं!
अगर वो अच्छा काम कर रहे हैं तो अपना रिटर्न क्यों नहीं फ़ाइल कर रहे? गृह मंत्रालय की रिपोर्ट कहती है कि पिछले 10 साल में 90 हज़ार करोड़ रुपये इनको मिले जिसका केवल 2% रिटर्न फ़ाइल हुआ। इसका मतलब सिर्फ़ रु 1,800 करोड़ का हिसाब मौजूद है। रु 82,800 करोड़ का कोई हिसाब नहीं। अगर वो अच्छा काम कर रहे हैं तो पैसा कहाँ-कहाँ गया उनको पता होना चाहिए। असल में इन पैसों से आतंवादियों और माओवादियों की मदद की जा रही है।

 

आप पिछले कई महीनों से आम आदमी पार्टी पर आरोप लगा रहे हैं। इन आरोपों की पुष्टि के लिए आपके पास कोई सबूत हैं?
इनके नेताओं के नज़दीक रहे लोगों पर अगर स्टिंग किया जाए तो बात बाहर आ जाएगी। इसके अलावा मेरे पास उस दस्तावेज़ की कॉपी है जिससे पता चलता है कि कांग्रेस सरकार के गृह मंत्रालय ने मनीष सिसोदिया के एन जी ओ “कबीर” के पंजीकरण से पहले ही उसे विदेश से धन प्राप्त करने की अनुमति दे दी थी।

 

जब भी कोई आम आदमी पार्टी के अन्दर विद्रोह करता है तब पार्टी का नेतृत्व उस विद्रोही पर यह आरोप लगा देता है कि वो चुनाव के लिए टिकट मांग रहा था, मना किये जाने पर उसने विद्रोह कर दिया। या फिर वह कांग्रेस या भाजपा का एजेंट है। पहले उन्होंने आप पर भी यह इल्ज़ाम लगाया कि आपने टिकट मांगी थी। जब वह साबित न हुआ तो आजकल वो कह रहे हैं कि आप भाजपा के इशारों पर नाच रहे हैं!
मैं बीजेपी के इशारों पर नाच रहा हूँ या नहीं नाच रहा हूँ इसका उन्हें सबूत देना चाहिए। क्या मेरी किसी से जान पहचान है? क्या मैं किसी से लिंक्ड हूँ? लेकिन मैं उनपर आरोप लगाता हूँ कि वो विदेशी ताक़तों के इशारे पर नाच रहे हैं और मैं उनको चुनौती देता हूँ कि उनमें से चार लोग अपने-अपने पासपोर्ट के वृत्तांत हमें दिखा दें तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।

 

कौन से चार लोग?
अरविन्द केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, योगेन्द्र यादव और मेधा पाटकर। ये चार लोग बताएँ कि 2004 से अब तक ये कितनी बार जर्मनी गए हैं और कितनी बार USA गए हैं। इनके डिटेल्स ये दिखाएँ तो पूरा दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा।

मैं अपने कॉल डिटेल्स दिखाने के लिए तैयार हूँ। ये अपने कॉल डिटेल्स दिखाएँ कि इनकी कब-कब कपिल सिब्बल से बात हुई थी। मैं इनको कहता हूँ कि ये विदेशियों के, बाहर के एजेंट्स हैं। और अगर इन्हें इस बात से इनकार है तो ये अपने कॉल डिटेल्स दिखाएँ और अपनी विदेश यात्रा का ब्यौरा दें।

 

साक्षात्कार के लिए धन्यवाद। इसके अलावा आप जनता को कोई सन्देश देना चाहते हैं?
मैं सभी लोगों से आह्वान करता हूँ कि देश के जितने भी राष्ट्रवादी लोग हैं वो इस आन्दोलन के साथ जुड़ें और इसमें सहयोग करें और भारत सरकार पर मुझे भरोसा है कि वो हमारे रिफ़ॉर्म्स के एजेंडा पर काम शुरू कर देगी तो हमें सड़कों पर उतरना नहीं पड़ेगा।

Contribute to our cause

Contribute to the nation's cause

Sirf News needs to recruit journalists in large numbers to increase the volume of its reports and articles to at least 100 a day, which will make us mainstream, which is necessary to challenge the anti-India discourse by established media houses. Besides there are monthly liabilities like the subscription fees of news agencies, the cost of a dedicated server, office maintenance, marketing expenses, etc. Donation is our only source of income. Please serve the cause of the nation by donating generously.

Join Sirf News on

and/or

Surajit Dasgupta
Surajit Dasgupta
Co-founder and Editor-in-Chief of Sirf News Surajit Dasgupta has been a science correspondent in The Statesman, senior editor in The Pioneer, special correspondent in Money Life, the first national affairs editor of Swarajya, executive editor of Hindusthan Samachar and desk head of MyNation

Similar Articles

Comments

Scan to donate

Swadharma QR Code
Advertisment
Sirf News Facebook Page QR Code
Facebook page of Sirf News: Scan to like and follow

Most Popular

[prisna-google-website-translator]
%d bloggers like this: