अखिलेश यादव

लखनऊ | समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सभी 11 विधानसभा सीटों पर पार्टी अकेले ही उपचुनाव लड़ेगी, यदि बसपा के साथ उसका गठबंधन समाप्त हो जाता है।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी आगामी उपचुनावों को अकेले लड़ेगी, लेकिन भविष्य में सपा के साथ काम कर सकती है यदि यादव अपने कर्तव्यों को पूरा करने में सक्षम हैं।

यादव ने कहा, “यदि गठबंधन समाप्त होता है, तो हम जल्द ही पार्टी के नेताओं से परामर्श के बाद उपचुनाव के लिए सभी 11 सीटों पर सपा उम्मीदवारों को मैदान में उतारेंगे।”

“भले ही हमारे रास्ते अलग हैं, हम इसका स्वागत करते हैं,” उन्होंने कहा।

सपा प्रमुख ने कहा कि पार्टी के लिए उसके कार्यकर्ताओं की हत्या ‘गतबंधन’ से ज्यादा महत्वपूर्ण थी।

इससे पहले गठबंधन तोड़ने की पहल कल मायावती ने की जब बसपा की समीक्षा बैठक के बाद उन्होंने कहा कि यादवों के वोट उनके प्रत्याशियों को नहीं मिले जिसके कारण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा ने गठबंधन को लोकसभा चुनाव में हरा दिया।

इसके तुरंत बाद सपा के नेता हरि ओम यादव की प्रतिक्रिया आई जिसमें उन्होंने मायावती के दावे का खंडन किया।

परन्तु इस विवाद से दूर अखिलेश यादव कल बसपा के साथ आज़मगढ़ में एक साझी रैली कर रहे थे जहाँ उन्होंने लोगों का गठबंधन को वोट देने के लिए शुक्रिया अदा किया।

गठबंधन टूटने की कगार पर है जान कर केन्द्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने चुटकी लेते हुए कहा कि उन्होंने तो चुनाव-पूर्व ही बता दिया था कि चुनाव के ख़त्म होते ही कथित महागठबंधन भी समाप्त हो जाएगा।

लेकिन आज अपने सुर में थोड़ी सी नरमी लाते हुए बसपा प्रमुख ने कहा कि सपा के साथ उनकी पार्टी का रिश्ता बना रहेगा भले ही उपचुनाव वे अलग लड़ें।

उत्तर प्रदेश की विधानसभा के लिए उपचुनाव हो रहे हैं क्योंकि लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से नौ भाजपा विधायकों और सपा, बसपा के एक-एक विधायक सांसद बन गए जिससे 11 विधानसभा सीटें रिक्त हो गईं।