कल प्रधानमंत्री इनको मंत्री बना सकते हैं

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अपनी विदेश यात्रा से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल करने जा रहे हैं। रविवार को वे विदेश यात्रा पर रवाना होंगे। उससे पहले मंत्रिमंडल में नए चेहरे शामिल कर लिए जाएंगे। यह तीसरा फेरबदल होगा।

मंत्रिमंडल में फेरबदल से राजनीतिक स्थिरता और संतुलन को बनाए रखने की कोशिश होती है। यह राजनीतिक प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा भी है। इसमें मंत्रियों के काम-काज को आकंलन का आधार बनाया जाता है। पर एकमात्र यही कारण फेरबदल का नहीं होता। इसके अलावा राजनीतिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर मंत्रिमंडल में फेरबदल को अंजाम दिया जाता है। हालांकि कौन मंत्री रहे और किसे हटाएं, यह विशेषाधिकार प्रधानमंत्री का ही होता है, फिर भी इस बारे में विमर्श की प्रक्रिया भी प्रधानमंत्री अपनाते हैं। इस फेरबदल से पहले अध्यक्ष अमित शाह ने छह मंत्रियों से बात की। उन्हें संकेत दे दिए। उनसे इस्तीफा लिया। चर्चा है कि कलराज मिश्र, उमा भारती, बंडारू दत्तात्रेय, राजीव प्रताप रूड़ी, गिरराज सिंह, संजीव बलियान और महेंद्र पांडेय को अलग-अलग कारणों से हटाया जा रहा है।

जिन नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल करने के अनुमान हैं वे हैं — प्रह्लाद पटेल, रूपा गांगुली, विनय सहस्त्रबुद्धे, सत्यपाल सिंह, प्रह्लाद जोशी आदि। इस बार जद(यू) का प्रतिनिधित्व भी सुनिश्चित है। अनुमान है कि जद(यू) से आरसीपी सिंह, संतोश कुमार और कहकशाँ परवीन मंत्री बनाए जाएंगे। इनके लिए जगह बने इसलिए राजीव प्रताप रूड़ी और गिरिराज सिंह से इस्तीफा लिया गया है। हर मंत्रिमंडल के फेरबदल में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को साधने का लक्ष्य प्रधानमंत्री रखते हैं। सत्तारूढ़ गठबंधन में मंत्री बनने की कतार हमेशा लंबी होती है। उनमें से नए चेहरे की खोज कोई आसान काम नहीं होता। उससे ज्यादा कठिन होता है मंत्री को हटाने का फैसला। यह तो सबको पता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कोई दबाव काम नहीं करता। वे फैसले स्वयं लेते हैं। सलाह चाहे जिसकी हो। वह उनके लिए सलाह से ज्यादा मायने नहीं रखती।

भाजपा से राम माधव, सुरेश अंगदी, हेमंत विश्व शर्मा, महेश गिरि, शोभा करंदलाजे एवं ओम माथुर में से एकाधिक बतौर मंत्री मोदी द्वारा चुने जा सकते हैं।

अन्ना द्रमुक के दो गुटों के मेल के बाद और इस पार्टी के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल होने के कारण तम्बिदुरै, पी वेणुगोपाल एवं वी मैत्रेयन में से एकाधिक मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं।

माना जा रहा है कि मोदी मंत्रिमंडल में यह आखिरी फेरबदल होगा। पहला फेरबदल नवंबर 2014 में हुआ था जिसमें 21 नए मंत्री बनाए गए थे। दूसरा फेरबदल जुलाई 2016 में हुआ। यह उस क्रम में  तीसरा फेरबदल है। अनिल माधव दवे के असामयिक निधन से पर्यावरण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार डॉ हर्षवर्धन संभाल रहे हैं। मनोहर पर्रिकर के गोवा मुख्यमंत्री बनने के कारण रक्षा मंत्रालय का प्रभार वित्तमंत्री अरुण जेटली के जिम्मे है। उन्होंने पत्रकारों से कहा भी कि जल्दी ही वे इस अतिरिक्त दायित्व से मुक्त होने जा रहे हैं।

मंत्रिमंडल में फेरबदल की रूपरेखा अर्से से बन रही थी। इसकी आवश्यकता धीरे-धीरे अपरिहार्यता में परिवर्तित हो गई क्योंकि दोहरे प्रभार से अनेक महत्वपूर्ण मंत्रालयों का काम-काज ढीला ही चल रहा था। राजनीतिक चुनौतियों का अपना तकाजा तो था ही। पश्चिम बंगाल में भाजपा के पुनरोदय की संभावना है। इसलिए केंद्रीय मंत्रिमंडल में एक चेहरा ऐसा होना चाहिए जो राज्य में वैकल्पिक नेतृत्व दे सके। इसी कारण रूपा गांगुली के नाम की चर्चा है। उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि टीवी धारावाहिक महाभारत के रोल से शुरू होती है। इससे उन्हें नाम और धाम मिला। कई स्तरों पर परामर्श का सिलसिला पिछले दिनों चला। कहते हैं कि गुरुवार को वह पूरा हो गया।

जानकार सूत्रों ने बताया कि ऐसा नहीं है कि जो मंत्री हटाए जा रहे हैं वे सभी नकारे साबित हुए हैं। उन्हें हटाने के कई और उचित कारण हैं। कलराज मिश्र अपनी बढ़ती उम्र के कारण हटाए जा रहे हैं। हो सकता है उनको नई जिम्मेदारी भी मिले। ऐसे ही कुछ मंत्रियों के इस्तीफे का कारण संगठन की जरूरत बताई जा रही है। जिन नए चेहरों को मंत्री बनाने की चर्चा है वे आगामी विधानसभा चुनावों की जरूरत को पूरा करते हैं। सूत्रों की माने तो राजनाथ सिंह के निवास पर वरिष्ठ नेताओं जैसे अरुण जेटली, सुषमा स्वराज और नितिन गडकरी की बैठक मशविरे का हिस्सा ही थी।

हिन्दुस्थान समाचार के सौजन्य से

About Rambahadur Rai

Veteran journalist and author, the first to get arrested under the Indira Gandhi regime during Emergency, former editor of Jansatta, presently the chief editor of Hindusthan Samachar, Yugvarta and Yathavat
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