ट्रंप की धमकी से विचलित पाकिस्तान बुला सकता है संयुक्त संसदीय सत्र

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इस्लामाबाद – आतंकवादियों को शरणस्थली मुहैया कराने को लेकरअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद से पाकिस्तान परेशान है और सुरक्षित गलियारा तलाश रहा है। इस सिलसिले में गुरुवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई आैर अब सरकार अपने आगे के रुख पर चर्चा करने और उसे अंतिम रूप देने लिए संयुक्त संसदीय सत्र बुलाने की योजना बना रही है। यह जानकारी मीडिया रिपोर्ट से मिली।

समाचार पत्र डॉन के मुताबिक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खकान अब्बासी ने सीनेट में अपने संक्षिप्त बयान में संकेत दिया कि इस मामले पर चर्चा के लिए संयुक्त सत्र बुलाया जा सकता है। उन्होंने अमेरिका के रुख को एक गंभीर विषय बताया और कहा कि संघीय कैबिनेट ने मंगलवार को इस पर तीन घंटे तक विचार विमर्श किया और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने इस मामले पर चार घंटे तक चर्चा की।

इससे पहले सीनेट अध्यक्ष रजा रब्बानी ने प्रधानमंत्री को सूचित किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के आक्रामक बयानों के बाद रुख तय करने के लिए सीनेट पैनल का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि पैनल मसौदे को पूरा करने की कगार पर है। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव पारित करने या किसी संशोधन के लिए इन सिफारिशों को संसद की संयुक्त बैठक में पेश किया जाएगा और इस विचार को प्रधानमंत्री ने स्वीकार कर लिया।

इससे पहले ट्रंप के बयान पर चर्चा में भाग लेते हुए सीनेटरों ने कहा कि अमेरिका को यह याद रखना चाहिए कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में आगे रहा है और वह सर्वाधिक प्रभावित हुआ है।उन्होंने कहा कि सहायता के रूप में डॉलर हासिल करने के लिए पाकिस्तान का मजाक उड़ाने वाले अमेरिका को यह याद रखना चाहिए कि उसने युद्ध में पाकिस्तान को हुए करीब 150 अरब डॉलर के नुकसान का एक अंश भी नहीं दिया है।

सीनेटरों ने कहा कि तत्कालीन सैन्य शासक ‘जनरल परवेज मुशर्रफ के अमेरिका के सामने पूर्ण आत्मसमर्पण’ के बाद देश में हुए विस्फोटों के कारण पाकिस्तान के शैक्षणिक संस्थान, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य बुनियादी सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इसके अलावा हजारों आम नागरिकों और सशस्त्र कर्मियों की जान गई। पूर्व गृहमंत्री रहमान मलिक ने कहा कि वाशिंगटन से मिली चेतावनी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

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