सरकार बताए पुराने प्रतिबंधित नोट जमा होंगे या नहीं — सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली — सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और रिज़र्व बैंक को निर्देश दिया है कि वो यह बताएं कि पुराने नोटों को जमा कराने वाले असली जमाकर्ताओं को नोटिस जमा कराने की इजाज़त देंगे या नहीं। कोर्ट ने दोनों को दो सप्ताह में फ़ैसला कर बताने का निर्देश दिया है।

सुनवाई के दौरान चीफ़ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र से कहा कि आपने वादा किया था कि जिन जमाकर्ताओं की वाजिब वजह है उन्हें पुराने नोट जमा करने की अनुमति दी जाएगी। आप इस वादे से पीछे नहीं हट सकते। जो व्यक्ति यह सबूत देता है कि उसकी दिक़्क़त वाजिब है उसे जमा करने का मौक़ा ज़रूर मिलना चाहिए। उसके बाद केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने कहा कि वे हर उचित जमाकर्ता की हक़ीक़त जानने को तैयार हैं। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस पर केंद्र दो हफ़्ते में फ़ैसला कर प्रस्ताव लेकर आए।

सुनवाई के दौरान चीफ़ जस्टिस ने कहा कि हम उनके वाजिब कारणों से सहमत हैं लेकिन उन्हें जमा करने का कोई विंडो मौजूद नहीं है। आप उनके पैसे लीजिए और जाँच कीजिए। लेकिन अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो ये एक गंभीर मसला है।

वकील सुधा मिश्रा और अन्य ने याचिका दायर कर मांग की है कि पुराने रु० 500 और रु० 1,000 के नोट जमा करने का दिशानिर्देश जारी किया जाए। याचिका में कहा गया है कि पिछले साल नवंबर में जब नोटबंदी लागू किया गया था तब सरकार ने कहा था कि वाजिब लोगों के पैसे जमा किए जाएंगे लेकिन सरकार ने 31 दिसंबर 2016 को पुराने नोट जमा करने के सारे विंडो बंद कर दिए। याचिका में सरकार पर वादाखिलाफी करने का आरोप लगाया है।

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