सीबीडीटी करेगी सात लोकसभा सांसदों की संपत्ति की जांच

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नई दिल्ली – केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने सांसदों और विधायकों की आय से अधिक संपत्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। सीबीडीटी के मुताबिक चुनावी हलफनामे के मुताबिक 26 लोकसभा सांसदों, 11 राज्यसभा सांसदों और 257 विधायकों की संपत्ति में काफी वृद्धि हुई है। हलफनामे के मुताबिक आयकर विभाग ने जांच की और प्रथम दृष्टया पाया कि 26 लोकसभा सांसदों में से सात की संपत्ति में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। अब आयकर विभाग इन सात लोकसभा सांसदों की संपत्ति की जांच करेगी। 257 विधायकों में से 98 विधायकों की संपत्ति में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। उनकी संपत्ति की जांच की जा रही है।

सीबीडीटी के हलफनामे में कहा गया है कि इनके अलावा 42 और विधायकों की संपत्ति का आकलन किया जा रहा है। सीबीडीटी ने कहा कि समय-समय पर उसने निर्वाचन आयोग को इन सूचनाओं से अवगत कराया है। सीबीडीटी ने आज किसी विधायक और सांसद के नाम का खुलासा नहीं किया। इस मामले पर कल सुनवाई है जिसमें सीबीडीटी द्वारा सीलबंद लिफाफे में नामों का खुलासा करने की उम्मीद है।

पिछले छह सितम्बर को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों में धनबल के इस्तेमाल पर चिंता जताई थी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार इस बात के लिए खिंचाई की थी कि सांसदों और विधायकों की संपत्ति काफी बढ़ने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती। जस्टिस चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार से कहा कि उन सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपने क्या कार्रवाई की जिनकी संपत्ति चुनाव हलफनामा भरते के बाद काफी बढ़ गई। सुप्रीम कोर्ट लोक प्रहरी नामक एनजीओ की याचिका पर सुनवाई कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या आपने कभी नेताओं के चुनाव के समय घोषित धन और उनके द्वारा दायर आयकर रिटर्न में गड़बड़ियों की जांच की है। कोर्ट ने केंद्र के वकील एएसजी पीएस नरसिम्हा से पूछा कि आप एक तरफ चुनाव सुधार की बात कहते हैं लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं करते। आपने अभी तक क्या किया है। कोर्ट ने नरसिम्हा को निर्देश दिया कि नेताओं की संपत्ति की जांच के बारे में आयकर विभाग की रिपोर्ट 12 सितंबर को पेश करें। जब नरसिम्हा ने कहा कि हम कार्रवाई करेंगे तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम कोई भ्रमपूर्ण बयान नहीं सुनना चाहते हैं।

बता दें कि पांच सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को फटकार लगाते हुए पूछा था कि लोकसभा चुनाव के तीन साल बाद तक आपके पास अभी तक ये आंकड़ा मौजूद नहीं है कि किस उम्मीदवार ने चुनाव में कितने पैसे खर्च किए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि संसद कहता है कि अगर किसी उम्मीदवार ने चुनाव में तय सीमा से ज्यादा पैसे खर्च किये तो चुनाव आयोग कार्रवाई करता है लेकिन अगर आपके पास कोई आंकड़ा ही नहीं है तो कार्रवाई किस आधार पर करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा था कि आपको कैसे पता चलेगा कि लोकसभा में किसी उम्मीदवार ने पैसे ज्यादा खर्च किये? कोर्ट ने कहा आप कह रहे हैं कि डाटा डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर के पास है लेकिन 3 साल बीत गए डाटा आपके पास क्यों नहीं है? निर्वाचन आयोग ने कहा कि आंकड़ा जिला निर्वाची अधिकारियों के पास है। उन आंकड़ों को मंगाने के लिए तीन सप्ताह का समय चाहिए।

एनजीओ लोकप्रहरी ने याचिका दायर कर कहा है कि सुप्रीम कोर्ट दिशानिर्देश जारी करे कि नामांकन के वक्त ही उम्मीदवार अपने और अपने परिवार की आय के जरिया के बारे में बताएं। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इस मामले पर केंद्र सरकार ने अपने हलफनामा में कहा था कि नामांकन के वक्त उम्मीदवारों द्वारा अपने और अपने परिवार की आय की जानकारी जरूरी करने के लिए केंद्र तैयार है। केंद्र ने कहा था कि इसके लिए जल्द ही अधिसूचना जारी की जाएगी।

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