कैट ने वित्त मंत्री से की पुराने स्टॉक पर संशोधित एमआरपी की तारीख बढ़ाने की मांग

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नई दिल्ली – जीएसटी कॉउन्सिल द्वारा एमआरपी लगे हुए माल बेचने की तारीख को यदि 30 सितम्बर से आगे नहीं बढ़ाया तो देश में लगभग छह लाख करोड़ रुपये का एमआरपी लगा हुआ जीएसटी से पहले का माल आगे बेचा नहीं जा सकेगा। इस सम्बन्ध में कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से आग्रह किया है कि वर्तमान हालातों को देखते हुए इस अवधि को 31 मार्च 2018 तक आगे बढ़ाया जाए।

जीएसटी लागू करते समय यह प्रावधान किया गया था कि 30 जून को जो भी माल, जिस पर एमआरपी लगाना अनिवार्य है, वह माल संशोधित एमआरपी के स्टीकर लगाकर 30 सितम्बर तक ही बेचा जा सकेगा। पैकेजिंग कमोडिटी एक्ट के अंतर्गत यह प्रावधान है की जो भी माल पैकेज में बेचा जायेगा उस पर अनिवार्य रूप से एमआरपी छपी होनी चाहिए।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा की एक अनुमान के अनुसार अब भी देश में 30 जून से पहले का लगभग नौ लाख करोड़ रुपये का माल बाजार में है, जिसमें से लगभग छह लाख करोड़ रुपये का माल पैकेज में है जिस पर प्राय एमआरपी का स्टीकर लगा हुआ है। यदि इस माल को बेचने की अंतिम तारीख 30 सितम्बर से आगे नहीं बढ़ायी जाती है तो एक अक्टूबर से यह माल बाजार में नहीं बिक सकेगा। यदि इतनी बड़ी मात्रा में माल सप्लाई चेन से बाहर होता है तो इसका निश्चित रूप से मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर पर विपरीत असर पड़ेगा और दूसरी ओर अर्थव्यवस्था पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा तथा रोज़मर्रा की वस्तुओं की किल्लत की सम्भावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे हालातों में कैट ने केंद्रीय वित्त मंत्री से आग्रह किया है की इस तारीख को 31 मार्च 2018 तक बढ़ाया जाए जिससे व्यापारी इस स्टॉक को बेच सकें।

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